Edited By Sahil Kumar,Updated: 24 May, 2026 01:05 PM

पंजाब के युवा धावक गुरिंदरवीर सिंह ने भारतीय एथलेटिक्स में नया इतिहास रच दिया है। 25 वर्षीय स्प्रिंटर ने शनिवार को रांची में आयोजित फेडरेशन कप में पुरुषों की 100 मीटर दौड़ 10.09 सेकंड में पूरी कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इसी के साथ वह...
नेशनल डेस्कः पंजाब के युवा धावक गुरिंदरवीर सिंह ने भारतीय एथलेटिक्स में नया इतिहास रच दिया है। 25 वर्षीय स्प्रिंटर ने शनिवार को रांची में आयोजित फेडरेशन कप में पुरुषों की 100 मीटर दौड़ 10.09 सेकंड में पूरी कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इसी के साथ वह 10.10 सेकंड से कम समय में 100 मीटर दौड़ने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए।
दिलचस्प बात यह है कि गुरिंदरवीर ने महज दो दिनों के भीतर दो बार राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा। शुक्रवार को पहले सेमीफाइनल में उन्होंने 10.17 सेकंड का समय निकालकर अनिमेष कुजूर के 10.18 सेकंड के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया था। हालांकि, दूसरे सेमीफाइनल में अनिमेष ने शानदार वापसी करते हुए 10.15 सेकंड का समय निकाला और रिकॉर्ड फिर अपने नाम कर लिया। लेकिन फाइनल में गुरिंदरवीर ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए नया इतिहास रच दिया।
गुरिंदरवीर और अनिमेष जैसे तेज धावकों के प्रदर्शन ने भारत की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। माना जा रहा है कि आगामी राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में भारतीय एथलीट पदक जीतने की मजबूत दावेदारी पेश कर सकते हैं। खास बात यह है कि गुरिंदरवीर का 10.09 सेकंड का समय, अगर 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में होता, तो उन्हें रजत पदक दिलाने के लिए काफी साबित होता।
फाइनल रेस के बाद बिरसा मुंडा स्टेडियम में खास नजारा देखने को मिला। जैसे ही स्क्रीन पर 10.09 सेकंड का समय दिखा, स्टेडियम में खुशी की लहर दौड़ गई। गुरिंदरवीर ने अपनी बिब हटाकर कैमरे की ओर एक संदेश दिखाया, जिस पर लिखा था — “अभी काम खत्म नहीं हुआ है, सफर जारी है।” इसे सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना करने वालों को जवाब माना गया।
दौड़ के बाद गुरिंदरवीर ने कहा कि बचपन से ही लोगों ने उन्हें 100 मीटर छोड़कर दूसरी स्पर्धा अपनाने की सलाह दी थी। उनका कहना था कि भारतीय धावक इस इवेंट में आगे नहीं बढ़ सकते, लेकिन उन्होंने सभी धारणाओं को गलत साबित करने का लक्ष्य बनाया।
गुरिंदरवीर के कोच जेम्स हिलियर ने उनके प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा कि खिलाड़ी ने ट्रेनिंग के दौरान सीखी गई रणनीति को बेहतरीन तरीके से ट्रैक पर उतारा। उन्होंने बताया कि रिकॉर्ड टूटने के दबाव से बचाने के लिए गुरिंदरवीर को सोशल मीडिया और फोन से दूर रखा गया था, ताकि वह पूरी तरह अपने प्रदर्शन पर ध्यान दे सकें।
गुरिंदरवीर के पिता कमलजीत सिंह, जो पंजाब पुलिस से सेवानिवृत्त कांस्टेबल हैं, ने बेटे की मेहनत को याद करते हुए कहा कि उसने कभी मौसम की परवाह नहीं की और लगातार अभ्यास करता रहा। उन्होंने कहा कि अब उसकी मेहनत का नतीजा सबके सामने है। यह पहली बार नहीं है जब गुरिंदरवीर ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई हो। पिछले साल भी उन्होंने इंडियन ग्रां प्री में शानदार समय निकालकर रिकॉर्ड कायम किया था, लेकिन इस बार उनका प्रदर्शन कहीं ज्यादा मजबूत और ऐतिहासिक माना जा रहा है।