केरल : 5वीं कक्षा की छात्रा नक्षत्र ने एक मिनट में बताए 87 देशों के कॉलिंग कोड, नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया

Edited By Updated: 08 Oct, 2026 08:02 AM

schoolgirl nakshatra breaks guinness record with 87 country calling codes

केरल की स्कूली छात्रा नक्षत्र एस ने एक मिनट में 87 देशों के कॉलिंग कोड सही-सही बताकर एक नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने 77 कोड बताने के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। 5वीं कक्षा की छात्रा नक्षत्र ने यह उपलब्धि 20 अप्रैल 2026 को...

तिरुवनंतपुरम : केरल की स्कूली छात्रा नक्षत्र एस ने एक मिनट में 87 देशों के कॉलिंग कोड सही-सही बताकर एक नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने 77 कोड बताने के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। 5वीं कक्षा की छात्रा नक्षत्र ने यह उपलब्धि 20 अप्रैल 2026 को कोल्लम जिले के कडाक्कल में स्थित गागो कन्वेंशन सेंटर में आधिकारिक गवाहों और टाइमकीपर की मौजूदगी में हासिल की। यह रिकॉर्ड "एक मिनट में सबसे ज़्यादा देशों के कॉलिंग कोड पहचानने" की गिनीज श्रेणी में बनाया गया जिसमें नक्षत्र ने बेंचमार्क को 77 से बढ़ाकर 87 कर दिया। 

इससे पहले 77 देशों के कॉलिंग कोड बताने का रिकॉर्ड युक्ता आर मनोज के नाम था जिन्होंने 19 जुलाई 2025 को यूनाइटेड किंगडम के एक्सेटर में यह उपलब्धि हासिल की थी। नक्षत्र 2023 से 'ब्रेन हैक' से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने शुरुआत में याददाश्त बढ़ाने की कई तकनीकें सीखीं और उन्हें अपनी पढ़ाई और रोजमर्रा की सीख में आजमाना शुरू किया। याददाश्त के प्रशिक्षण में उनकी रुचि ने उन्हें और भी मुश्किल टास्क और रिकॉर्ड बनाने की कोशिशों की ओर प्रेरित किया। 

गिनीज रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य तय करने से पहले नक्षत्र ने याददाश्त से जुड़ी कई चुनौतियों का अभ्यास किया, जिसमें पीरियोडिक टेबल, देशों की राजधानियां और नंबर-आधारित क्रम याद करना शामिल था। गिनीज खिताब की कोशिश करने से पहले उन्होंने एक एशियाई रिकॉर्ड भी बनाया था। उन्होंने खास तौर पर देशों के कॉलिंग कोड वाले चैलेंज के लिए लगभग एक साल तक व्यवस्थित तैयारी की। उनकी लगातार ट्रेनिंग और नियमित अभ्यास ने उन्हें एक मिनट की सख्त समय-सीमा के भीतर बेहतर प्रदर्शन करने और अंततः मौजूदा रिकॉर्ड से 10 कोड ज्यादा बताने में मदद की। 

नक्षत्र अभी ग्रीन वैली इंटरनेशनल स्कूल में 5वीं कक्षा की छात्रा हैं। उनकी यह उपलब्धि व्यवस्थित ट्रेनिंग, लगातार अभ्यास और अनुशासन का नतीजा है, साथ ही उन्हें उनके माता-पिता, सानोज एस और विद्या आर एस का भी सहयोग मिला। 
 

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