Edited By Ramanjot,Updated: 07 Mar, 2026 05:05 PM

हृदय रोगों के उपचार में वैज्ञानिकों ने बड़ी सफलता हासिल की है। टेक्सास ए एंड एम, कोलंबिया और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा इंजेक्शन विकसित किया है जो हार्ट अटैक के बाद दिल को खुद को ठीक करने में मदद करेगा।
Heart Attack Injection: हृदय रोग (Heart Disease) के उपचार में दुनिया के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी सफलता हासिल की है जो चिकित्सा जगत की दिशा बदल सकती है। टेक्सास ए एंड एम, कोलंबिया और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मिलकर एक ऐसा 'स्मार्ट इंजेक्शन' विकसित किया है, जो हार्ट अटैक के बाद क्षतिग्रस्त हुए दिल को खुद को ठीक करने (Self-Repair) में मदद करेगा। यह तकनीक न केवल मरीजों की जान बचाएगी, बल्कि जटिल ओपन-हार्ट सर्जरी की आवश्यकता को भी काफी हद तक कम कर सकती है।
बांह पर लगेगा इंजेक्शन, हफ्तों तक रहेगा असर
आमतौर पर हार्ट अटैक के बाद गंभीर सर्जरी या लंबे अस्पताल प्रवास की जरूरत होती है। लेकिन इस नई खोज के अनुसार, यह इंजेक्शन मरीज की बांह (Arm) पर लगाया जा सकेगा। यह एक साधारण शॉट की तरह होगा, जो हफ्तों तक शरीर के भीतर रहकर दिल की मांसपेशियों को रिकवर करने में मदद करेगा।
कैसे काम करता है यह 'जादुई' इंजेक्शन?
जब किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक आता है, तो दिल की मांसपेशियों पर भारी दबाव पड़ता है। हमारा शरीर इस तनाव को कम करने के लिए प्राकृतिक रूप से ANP (Atrial Natriuretic Peptide) नामक हार्मोन बनाता है। शरीर में यह हार्मोन बहुत कम मात्रा में बनता है, जो पूरी रिकवरी के लिए पर्याप्त नहीं होता। यह नया इंजेक्शन शरीर की कोशिकाओं को एक 'विशेष निर्देश' भेजता है, जिससे शरीर खुद अधिक मात्रा में ANP हार्मोन पैदा करने लगता है। यह हार्मोन रक्त के माध्यम से दिल तक पहुंचता है, उसका तनाव कम करता है और उसे दोबारा स्वस्थ होने में मदद करता है।
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saRNA तकनीक: दिल की सुरक्षा का नया कवच
प्रोफेसर हुआंग और उनकी टीम ने इस इंजेक्शन में saRNA (Small Activating RNA) तकनीक का उपयोग किया है। इसकी खासियतें इसे अन्य दवाओं से अलग बनाती हैं:
स्व-प्रतिकृति (Self-Copying): यह तकनीक शरीर के अंदर अपनी कॉपी बना सकती है, जिससे बहुत कम डोज में भी लंबे समय तक लाभ मिलता है।
दीर्घकालिक प्रभाव: सिर्फ एक बार इंजेक्शन लगाने से इसका असर कई हफ्तों तक बना रहता है।
मांसपेशियों की मजबूती: हार्ट अटैक के बाद जो मांसपेशियां कमजोर होकर मर जाती हैं, यह तकनीक उन्हें बचाने और मजबूत करने का काम करती है।
कब तक उपलब्ध होगा यह उपचार?
वर्तमान में कोलंबिया और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ इस शोध को अगले चरण में ले जा रहे हैं। इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने से पहले इसकी सुरक्षा और सटीक मात्रा (Dosage) की गहन जांच की जा रही है। यदि परीक्षण सफल रहे, तो आने वाले कुछ वर्षों में यह हार्ट अटैक के इलाज का सबसे सुलभ और प्रभावी तरीका बन जाएगा।