Edited By Tanuja,Updated: 14 Sep, 2026 12:03 PM

लंदन में रविवार को टेम्स नदी के तट पर पहली बार गंगा आरती आयोजित की गई। हजारों लोग इस आयोजन के साक्षी बने। चिन्मय मिशन यूके और ‘टोटली टेम्स’ के सहयोग से हुए समारोह में दीप, मंत्र और भजनों के जरिए भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण...
London: भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा ने रविवार को लंदन में इतिहास रच दिया। टेम्स नदी के तट पर पहली बार गंगा आरती का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार और भजन-संगीत से टेम्स का किनारा भारतीय संस्कृति और आस्था के रंग में रंग गया। ‘टेम्स तट पर गंगा आरती : प्रकाश उत्सव’ नाम से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन चिन्मय मिशन यूके ने ‘टोटली टेम्स’ के वार्षिक उत्सव के सहयोग से किया। यह आयोजन चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दुनिया भर में आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला का हिस्सा था।
भारत में गंगा के तट पर होने वाली प्रसिद्ध आरती की परंपरा से प्रेरित इस आयोजन को केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रखा गया। इसे प्रकृति, ज्ञान और चेतना के जीवनदायी प्रवाह के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया।चिन्मय मिशन यूके की शिक्षिका ब्रह्मचारिणी श्रीप्रिया चैतन्य ने कहा कि पीढ़ियों से श्रद्धालु गंगा के तट पर दीप जलाकर मां गंगा की आराधना करते आए हैं और प्रकृति तथा जीवन को संवारने वाली शक्तियों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। टेम्स के तट पर आयोजित गंगा आरती ने भी इसी भावना को आगे बढ़ाया और कृतज्ञता, आशा तथा एकता के साझा भाव में लोगों को जोड़ा।
गंगा आरती का महत्व
श्रीप्रिया चैतन्य के अनुसार, चिन्मय मिशन के लिए गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि ज्ञान के प्रवाह का प्रतीक भी है। उन्होंने बताया कि मिशन के संस्थापक स्वामी चिन्मयानंद ने वेदांत के शाश्वत ज्ञान और आध्यात्मिक संदेश को हिमालय की पवित्र भूमि से जन-जन तक पहुंचाने के लिए अपना जीवन समर्पित किया। चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित यह समारोह ज्ञान, सेवा और कृतज्ञता की उस परंपरा का उत्सव भी बना, जो भौगोलिक सीमाओं से परे आगे बढ़ रही है। गंगा आरती हिंदू धर्म का एक प्राचीन धार्मिक अनुष्ठान है। इसमें बड़ी संख्या में दीप प्रज्वलित कर मंत्रोच्चार, प्रार्थना और भजन-संगीत के माध्यम से मां गंगा के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। यह प्रकृति और उसके जीवनदायी स्वरूप के प्रति सम्मान और आस्था की भी अभिव्यक्ति है। चिन्मय मिशन के प्रवक्ता ने कहा कि प्रकृति के प्रति श्रद्धा गंगा आरती की आत्मा में ही समाहित है। हिंदू परंपरा में मां गंगा को पवित्र, जीवनदायिनी और समस्त जीवों का पोषण करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।
टेम्स की स्वच्छता का भी रखा गया ध्यान
टेम्स नदी के तट पर आयोजित इस आरती में धार्मिक परंपरा के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी विशेष ध्यान रखा गया। पूरा अनुष्ठान नदी के किनारे जमीन पर ही संपन्न किया गया और आरती में इस्तेमाल की गई किसी भी वस्तु को टेम्स नदी में प्रवाहित नहीं किया गया। इस तरह आयोजन के जरिए भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के साथ नदी और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया। ‘टोटली टेम्स’ एक न्यास की ओर से आयोजित वार्षिक उत्सव है, जिसकी शुरुआत 1997 में हुई थी। इसके तहत कला, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत और शिक्षा से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों के जरिए टेम्स नदी के महत्व और उसकी समृद्ध विरासत को सामने लाया जाता है।टेम्स के किनारे पहली बार गंगा आरती का आयोजन इसी सांस्कृतिक मंच पर भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की एक अनूठी प्रस्तुति बन गया।