Edited By Tanuja,Updated: 04 Jun, 2026 04:10 PM

बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद Salahuddin Ahmed के सीमा पर होने वाली हत्याओं (Border Killings) संबंधी बयान ने देश में विवाद खड़ा कर दिया है। आलोचकों का आरोप है कि उन्होंने भारत के लंबे समय से दिए जा रहे तर्क को स्वीकार कर लिया है, जिससे...
Dhaka: भारत-बांग्लादेश सीमा पर होने वाली कथित 'बॉर्डर किलिंग' को लेकर बांग्लादेश के गृह मंत्री Salahuddin Ahmed के एक बयान ने देश के भीतर नई बहस छेड़ दी है। कई बांग्लादेशी विशेषज्ञों और लेखकों का आरोप है कि गृह मंत्री ने ऐसे तर्क दिए हैं जो वर्षों से भारत की ओर से पेश किए जाते रहे हैं। 2 जून को सचिवालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि यदि कोई विदेशी सुरक्षा बल बांग्लादेश की सीमा में घुसकर या जीरो लाइन पर किसी व्यक्ति को मारता है, तभी उसे "बॉर्डर किलिंग" कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी अपराध में शामिल है या अवैध रूप से सीमा पार करता है और उस पर संबंधित देश का सीमा बल अपने कानूनों के अनुसार कार्रवाई करता है, तो ऐसे मामलों को "बॉर्डर किलिंग" नहीं कहा जाना चाहिए।
क्यों भड़के बांग्लादेशी विशेषज्ञ?
बांग्लादेशी लेखक और पत्रकार Jannatul Naeem ने बांग्लादेशी अखबार The Daily Star में प्रकाशित लेख में कहा कि यह वही तर्क है जिसका इस्तेमाल भारतीय अधिकारी और प्रवक्ता वर्षों से करते आए हैं। उनके अनुसार, भारत जिस दृष्टिकोण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह स्वीकार नहीं करवा सका, उसे बांग्लादेश के गृह मंत्री ने लगभग आधिकारिक नीति जैसा स्वरूप दे दिया है। आलोचकों का कहना है कि गृह मंत्री के बयान से "बॉर्डर किलिंग" शब्द का अर्थ ही बदल जाता है।नईम के अनुसार, सीमा सुरक्षा के संदर्भ में किसी नागरिक की मौत, चाहे वह सीमा के किसी भी ओर हुई हो, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और कानून के दायरे में जांच का विषय होती है। उनका तर्क है कि सवाल यह नहीं है कि व्यक्ति सीमा के किस तरफ था, बल्कि यह है कि क्या घातक बल का इस्तेमाल आवश्यक और कानूनी था।
भारत-बांग्लादेश वार्ता से पहले बढ़ा विवाद
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) और सीमा सुरक्षा बल (BGB) और Border Security Force (BSF) के बीच नई दिल्ली में उच्चस्तरीय वार्ता होने वाली है। आलोचकों का मानना है कि वार्ता से ठीक पहले दिया गया यह बयान बांग्लादेश के वार्ताकारों की स्थिति को प्रभावित कर सकता है और सीमा पर नागरिकों की मौत के मुद्दे पर ढाका की पारंपरिक कूटनीतिक लाइन को कमजोर कर सकता है।
भारत का रुख
भारत लंबे समय से कहता रहा है कि सीमा पर अधिकांश घटनाएं तस्करी, अवैध घुसपैठ और अन्य अपराधों से जुड़ी होती हैं तथा सुरक्षा बल कानून के अनुसार कार्रवाई करते हैं। वहीं बांग्लादेश में मानवाधिकार संगठन और कई राजनीतिक समूह इन मौतों को "बॉर्डर किलिंग" बताते हुए इन्हें रोकने की मांग करते रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह विवाद सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं है। यह इस बात से भी जुड़ा है कि भविष्य में बांग्लादेश भारत के साथ सीमा सुरक्षा, मानवाधिकार और सीमा पर नागरिकों की मौत जैसे संवेदनशील मुद्दों पर किस प्रकार की आधिकारिक नीति अपनाता है।