Edited By Parveen Kumar,Updated: 31 Aug, 2026 10:16 PM

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने कहा है कि खालिस्तान-समर्थक गतिविधियों में शामिल होना अपने आप में शरणार्थी सुरक्षा पाने का आधार नहीं हो सकता। उन्होंने साफ शब्दों में कहा "उत्पीड़न का सबूत दिखाएं: खालिस्तान-समर्थक...
नेशनल डेस्क : भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने कहा है कि खालिस्तान-समर्थक गतिविधियों में शामिल होना अपने आप में शरणार्थी सुरक्षा पाने का आधार नहीं हो सकता। उन्होंने साफ शब्दों में कहा "उत्पीड़न का सबूत दिखाएं: खालिस्तान-समर्थक गतिविधियां अपने आप में शरणार्थी सुरक्षा का आधार नहीं हैं।"
यह बयान एक रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें कहा गया है कि न्यूज़ीलैंड इमिग्रेशन एंड प्रोटेक्शन ट्रिब्यूनल ने 2025 और 2026 के दौरान खालिस्तान-समर्थक गतिविधियों से जुड़े सभी 40 प्रकाशित शरणार्थी मामलों को खारिज कर दिया है। इन खारिज किए गए मामलों में 2025 के 15 मामले और 2026 में अब तक के 25 मामले शामिल हैं। 40 में से एक भी मामले में शरण न मिलने का यह नतीजा 2024 के उन दो मामलों के बाद आया है, जिनमें आवेदकों को उनकी हाई-प्रोफाइल ऑनलाइन सक्रियता और लंबे समय से चल रही अलगाववादी गतिविधियों के आधार पर सुरक्षा दी गई थी।
ट्रिब्यूनल का स्पष्ट रुख: न्यूज़ीलैंड ट्रिब्यूनल के फैसलों से यह साफ होता है कि अहिंसक खालिस्तान जनमत संग्रह में भाग लेना, भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन करना या सामान्य राजनीतिक सहानुभूति रखना उत्पीड़न साबित करने के लिए काफी नहीं है। ऐसे मामलों में, आवेदकों को यह साबित करना होगा कि भारतीय अधिकारियों को उनकी गतिविधियों के बारे में पूरी जानकारी थी और उन्हें व्यक्तिगत उत्पीड़न या नुकसान का वास्तविक और गंभीर खतरा था।
अन्य देशों के लिए भी सलाह: BJP प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने जोर दिया कि अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन (UK) और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को भी इसी सिद्धांत का पालन करना चाहिए। उनके अनुसार, किसी को भी सिर्फ खालिस्तान-समर्थक गतिविधियों या राजनीतिक सहानुभूति के आधार पर शरण नहीं दी जानी चाहिए, बल्कि हर मामले में उत्पीड़न के वास्तविक, ठोस और व्यक्तिगत सबूतों की गहन जांच अनिवार्य होनी चाहिए।