Edited By Radhika,Updated: 19 May, 2026 12:26 PM

उत्तर भारत में इस समय गर्मी से काफी परेशान है। इस भयानक गर्मी के बीच अब ऐसा कहा जा रहा है कि इस साल 25 मई से 2 जून के बीच भीषण गर्मी अपने चरम पर होगी। इस खास समय को अवधि को पारंपरिक और व्यावहारिक भाषा में 'नौतपा' कहा जाता है। 'नव' और 'तप' शब्दों से...
नेशनल डेस्क: उत्तर भारत में इस समय गर्मी से काफी परेशान है। इस भयानक गर्मी के बीच अब ऐसा कहा जा रहा है कि इस साल 25 मई से 2 जून के बीच भीषण गर्मी अपने चरम पर होगी। इस खास समय को अवधि को पारंपरिक और व्यावहारिक भाषा में 'नौतपा' कहा जाता है। 'नव' और 'तप' शब्दों से मिलकर बने नौतपा का सरल अर्थ है— नौ दिनों की अत्यधिक तपिश। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों में इस दौरान पारा 42 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। दिन में सड़कों पर भट्टी जैसी स्थिति होती है, तो रातें उमस के कारण बेचैन करने वाली हो जाती हैं।
1. सूर्य की भौगोलिक स्थिति
नौतपा का सबसे बड़ा वैज्ञानिक कारण पृथ्वी का झुकाव और सूर्य की स्थिति है। पृथ्वी अपनी धुरी पर $23.5^\circ$ झुकी हुई है। मई के अंतिम सप्ताह और जून की शुरुआत में, सूर्य की स्थिति पृथ्वी की 'कर्क रेखा' (Tropic of Cancer) के ठीक ऊपर होती है। चूंकि उत्तर भारत के मैदानी इलाके इसी क्षेत्र के करीब आते हैं, इसलिए यहां सूर्य की किरणें बिल्कुल सीधी (लंबवत) पड़ती हैं। इस समय दिन सबसे लंबे और रातें छोटी होती हैं, जिससे धरती को गर्म होने के लिए बहुत लंबा समय मिलता है।
2. सूखी जमीन और थार मरुस्थल की 'लू'
लगातार बढ़ती गर्मी के कारण मई के अंत तक जमीन की पूरी नमी खत्म हो जाती है। सूखी मिट्टी और पेड़-पौधों में पानी की कमी के कारण वातावरण बहुत तेजी से गर्म होता है। इसी दौरान राजस्थान के थार रेगिस्तान की ओर से आने वाली गर्म और सूखी पछुआ हवाएं (जिन्हें 'लू' कहा जाता है) मैदानी इलाकों का तापमान अचानक बढ़ा देती हैं। वायुमंडल के उच्च दबाव के कारण बादल नहीं बन पाते, जिससे धूप सीधे धरती पर आती है।
3. असहनीय उमस और 'हीट इंडेक्स' (Heat Index)
नौतपा में केवल सूखी गर्मी नहीं होती, बल्कि उमस भी चरम पर होती है। इस समय तक अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी से भरी हवाएं उत्तर भारत की ओर बढ़ने लगती हैं। हवा में नमीं ज्यादा होने से शरीर का पसीना नहीं सूखता।

राहत की उम्मीद
ऐसा माना जाता है कि नौतपा गर्मी का आखिरी चरण होता है। इसके बाद जून के पहले सप्ताह में दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल के तट पर एंट्री होती है, जिसके बाद धीरे-धीरे पूरे देश को इस भीषण गर्मी से राहत मिलती है।
मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की चेतावनी और बचाव के उपाय
IMD द्वारा इस समय में हीटवेव या फिर रेड या ऑरेंज अलर्ट जारी किया जाता है। अत्यधिक उमस और गर्मी के कारण हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और चक्कर आने का खतरा बढ़ जाता है। इससे बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए:
- दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बहुत जरूरी न होने पर घर से बाहर निकलने से बचें।
- प्यास न लगने पर भी लगातार पानी, नींबू पानी, छाछ या ओआरएस (ORS) का घोल पीते रहें।
- हल्के रंग के, ढीले और सूती कपड़े पहनें। बाहर निकलते समय सिर और चेहरा सूती कपड़े या छतरी से ढकें।
- बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को ठंडी और हवादार जगहों पर रखें।