कानपुर में KDA का बड़ा एक्शन: 48 बीघा में फैली अवैध कॉलोनी पर चला बुलडोजर, 53 बीघा की दो अन्य प्लॉटिंग को नोटिस

Edited By Updated: 18 May, 2026 12:26 PM

bulldozers run on illegal colony spread over 48 bighas in kanpur

कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने अवैध एवं अनाधिकृत निर्माणों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत सोमवार को लगभग 48 बीघा क्षेत्रफल में विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त कर दिया जबकि करीब 53 बीघा क्षेत्रफल में विकसित दो अन्य अवैध प्लाटिंग के...

नेशनल डेस्क। कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने अवैध एवं अनाधिकृत निर्माणों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत सोमवार को लगभग 48 बीघा क्षेत्रफल में विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त कर दिया जबकि करीब 53 बीघा क्षेत्रफल में विकसित दो अन्य अवैध प्लाटिंग के विरुद्ध नोटिस जारी कर कारर्वाई शुरू की गई है। केडीए उपाध्यक्ष अंकुर कौषिक एवं सचिव अभय कुमार पाण्डेय के निर्देशन में विशेष कार्याधिकारी प्रवर्तन (जोन-4) एवं उपजिलाधिकारी डॉ. रवि प्रताप सिंह के नेतृत्व में यह कारर्वाई की गई।        

प्राधिकरण के अनुसार सकरापुर नर्वल स्थित मथुरापुर योजना के पीछे आराजी संख्या-109, 122 व अन्य भूखंडों पर श्री विशाल, श्री लल्लू एवं अन्य लोगों द्वारा बिना मानचित्र स्वीकृति और बिना अनुमति के लगभग 48 बीघा क्षेत्रफल में अवैध प्लाटिंग विकसित की जा रही थी। इसके विरुद्ध ध्वस्तीकरण की कारर्वाई करते हुए सड़क, नाला, बाउंड्रीवाल, बिजली के खंभे, पिलर, एंट्री गेट, सीवर लाइन तथा कई निर्मित एवं निर्माणाधीन भवनों को दो जेसीबी मशीनों के माध्यम से ध्वस्त कर दिया गया।        

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डॉ. रवि प्रताप सिंह ने बताया कि अभियान के दौरान दो अन्य अवैध प्लाटिंग भी चिन्हित की गई हैं। इनमें मौजा रमईपुर स्थित आराजी संख्या-1557, 1530, 1539, 1540, 1541, 1544, 1546 एवं 1551 पर लगभग 18 बीघा क्षेत्रफल तथा इंदिरा नगर फेज-1, निकट उरियारा क्षेत्र में लगभग 35 बीघा क्षेत्रफल में की जा रही प्लाटिंग के लिए स्वीकृत मानचित्र प्रस्तुत नहीं किया गया। 

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इन मामलों में नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं होने पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कारर्वाई की जाएगी। केडीए प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि प्राधिकरण क्षेत्र में किसी भी प्लाटिंग या भूमि की खरीद से पहले कानपुर विकास प्राधिकरण से ले-आउट एवं मानचित्र की स्वीकृति की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। साथ ही स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप ही निर्माण कार्य कराएं ताकि भविष्य में आर्थिक और मानसिक क्षति से बचा जा सके। 

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