लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मंगलवार से शुरू होगी बहस: 2 दिन चलेगी चर्चा, अमित शाह देंगे जवाब

Edited By Updated: 09 Mar, 2026 08:58 PM

lok sabha speaker no confidence motion

संसद के बजट सत्र के दौरान राजनीतिक माहौल और गर्म होने वाला है। विपक्ष द्वारा लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर मंगलवार (10 मार्च 2026) से सदन में चर्चा शुरू होगी।

नेशनल डेस्क: संसद के बजट सत्र के दौरान राजनीतिक माहौल और गर्म होने वाला है। विपक्ष द्वारा लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर मंगलवार (10 मार्च 2026) से सदन में चर्चा शुरू होगी। यह बहस लगभग दो दिनों तक चलने की संभावना है। चर्चा की शुरुआत दोपहर करीब 12:15 बजे से होने की उम्मीद है।

संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू इस प्रस्ताव पर सरकार की ओर से बहस की शुरुआत करेंगे। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेता अपने विचार रखेंगे। इनमें रविशंकर प्रसाद, निशिकांत दुबे, तेजस्वी सूर्या, जगदंबिका पाल, अनुराग ठाकुर और भर्तृहरि महताब जैसे सांसद शामिल हैं। बहस के अंतिम चरण में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बुधवार को सरकार की ओर से जवाब देंगे।

यह अविश्वास प्रस्ताव कांग्रेस के सांसद मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि द्वारा पेश किया गया है। प्रस्ताव को विपक्षी दलों का व्यापक समर्थन मिला है और इस पर कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। कांग्रेस के अलावा DMK, समाजवादी पार्टी, वाम दल समेत कई विपक्षी पार्टियां इसके समर्थन में हैं। शुरुआत में TMC ने हस्ताक्षर नहीं किए थे, लेकिन बाद में पार्टी ने विपक्ष के साथ खड़े होने का फैसला किया।

विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ओम बिरला सदन की कार्यवाही को निष्पक्ष तरीके से नहीं चला रहे और सरकार के पक्ष में झुकाव दिखा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि इसी वजह से संसद में लगातार टकराव और हंगामे की स्थिति बनती रही है।

सोमवार को भी पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष ने जोरदार विरोध किया, जिसके चलते लोकसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी और अंततः पूरे दिन के लिए सदन स्थगित कर दिया गया।

अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस मिलने के बाद स्पीकर ओम बिरला ने कहा है कि प्रस्ताव पर निर्णय होने तक वे सदन की अध्यक्षता नहीं करेंगे। इस दौरान लोकसभा की कार्यवाही का संचालन डिप्टी स्पीकर या फिर पैनल ऑफ चेयरमैन के सदस्य करेंगे।

यह पूरा घटनाक्रम बजट सत्र के दूसरे चरण में सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव को दर्शाता है। विपक्ष इसे संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष इसे राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बता रहा है। हालांकि लोकसभा में NDA के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण इस प्रस्ताव के पारित होने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!