Edited By Pardeep,Updated: 27 Apr, 2026 11:19 PM

महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले की एक अदालत ने वर्ष 2019 में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के एक अभियंता पर कीचड़ फेंकने के मामले में राज्य के मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे को सोमवार को दोषी ठहराते हुए उन्हें एक महीने कैद की सजा...
मुंबईः महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले की एक अदालत ने वर्ष 2019 में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के एक अभियंता पर कीचड़ फेंकने के मामले में राज्य के मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे को सोमवार को दोषी ठहराते हुए उन्हें एक महीने कैद की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि कानून निर्माताओं को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए। घटना के वक्त राणे विपक्ष के नेता थे। हालांकि, अदालत ने राणे की सजा निलंबित कर दी और उन्हें उच्च न्यायालय में अपील करने का समय दिया, जबकि इस मामले में 29 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया।
अतिरिक्त सत्र न्यायालय के न्यायाधीश वी एस देशमुख ने कहा, ''हालांकि राणे का इरादा घटिया काम और जनता को हो रही असुविधा के खिलाफ आवाज उठाना था, लेकिन उन्हें किसी लोक सेवक को सार्वजनिक रूप से अपमानित या बेइज्जत नहीं करना चाहिए था।'' न्यायाधीश ने कहा, ''यदि ऐसी घटनाएं होती रहीं, तो लोक सेवक गरिमा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर पाएंगे।'' अदालत ने कहा कि 'ऐसी प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना समय की मांग है।'
पूर्व केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के पुत्र नितेश राणे उन 30 लोगों में शामिल थे जिन पर दंगा, लोक सेवक को कार्य करने से रोकने के लिए हमला करने और आपराधिक साजिश रचने सहित विभिन्न अपराधों के आरोप लगाए गए थे। घटना के समय वह कांग्रेस में थे। अदालत ने अधिकांश आरोपों के समर्थन में अपर्याप्त साक्ष्य पाए जाने के कारण नितेश राणे सहित सभी आरोपियों को इन अपराधों से बरी कर दिया। हालांकि, अदालत ने नितेश राणे को धारा 504 (सार्वजनिक शांति भंग करने के उद्देश्य से जानबूझकर अपमान करना) के तहत दोषी पाया और उन्हें एक महीने जेल की सजा सुनाई।
राणे, जो उस समय कांग्रेस विधायक थे, ने चार जुलाई, 2019 को मुंबई-गोवा राजमार्ग के चौड़ीकरण कार्य का निरीक्षण करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अनुमंडल अभियंता प्रकाश शेडेकर को कंकावली में गड नदी पर बने पुल पर बुलाया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सड़क निर्माण की खराब गुणवत्ता और जलभराव से नाराज नितेश राणे और उनके समर्थकों ने अभियंता का विरोध किया। उन्होंने शेडेकर पर कीचड़ वाला पानी डाला और उन्हें सार्वजनिक रूप से कीचड़ में चलने के लिए मजबूर किया। अदालत ने रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों की जांच करने के बाद पाया कि शिकायतकर्ता (पीड़ित) भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण में उच्च पद पर कार्यरत थे।