Edited By Rohini Oberoi,Updated: 15 Jun, 2026 08:33 AM

देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए इन दिनों '8वां वेतन आयोग' (8th Pay Commission) सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। हर कोई यह गणित समझने में जुटा है कि नए वेतन आयोग के लागू होने के बाद उनके वेतन में कितनी बढ़ोतरी होगी और उनका...
8th Pay Commission : देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए इन दिनों '8वां वेतन आयोग' (8th Pay Commission) सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। हर कोई यह गणित समझने में जुटा है कि नए वेतन आयोग के लागू होने के बाद उनके वेतन में कितनी बढ़ोतरी होगी और उनका 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) क्या तय किया जाएगा। आमतौर पर केंद्र सरकार हर 10 साल में एक बार अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की सैलरी और भत्तों में संशोधन के लिए वेतन आयोग का गठन करती है।
आइए पुराने ट्रेंड और इतिहास के जरिए समझते हैं कि बढ़ी हुई सैलरी आपकी जेब तक कब और कैसे पहुंचेगी। यदि आप उम्मीद कर रहे हैं कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें तुरंत लागू हो जाएंगी तो आपको थोड़ा धैर्य रखना होगा। पुराने अनुभवों और वित्तीय आंकड़ों को देखें तो अंतिम रूप से सब कुछ तय होने में साल 2027 तक का समय लग सकता है।
7वें वेतन आयोग का इतिहास
पिछले (7th) वेतन आयोग का गठन 28 फरवरी 2014 को हुआ था। आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने और रिपोर्ट सौंपने में लगभग 21 महीने का लंबा समय लगा था जिसके बाद 19 नवंबर 2015 को रिपोर्ट पेश की गई थी।
8वें वेतन आयोग की समय सीमा
वर्तमान 8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। आयोग को रिपोर्ट सौंपने के लिए सरकार की ओर से 18 महीने का समय मिला है जो मई 2027 में पूरा हो रहा है लेकिन अगर पिछले रिकॉर्ड को देखें तो माना जा रहा है कि आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट 25 जुलाई 2027 के आसपास सरकार को सौंप सकता है।
कैसे बदलती है आपकी सैलरी?
नए कर्मचारियों के लिए यह समझना जरूरी है कि 'फिटमेंट फैक्टर' वह गणितीय गुणांक (Multiplier) है जो आपके पुराने मूल वेतन (Basic Pay) को नए ऊंचे वेतन ढांचे में बदल देता है। इसका सीधा फॉर्मूला इस प्रकार है:
$$\text{वर्तमान मूल वेतन (Current Basic Pay)} \times \text{फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor)} = \text{नया मूल वेतन (New Basic Pay)}$$
7वें वेतन आयोग का गणित: पिछले वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था। इसकी बदौलत कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7,000 (6ठे वेतन आयोग की) से सीधे बढ़कर ₹18,000 हो गई थी।
8वें वेतन आयोग से उम्मीद: चूंकि यह बड़ा बदलाव दशक में सिर्फ एक बार होता है इसलिए इसकी उत्सुकता ज्यादा है। हालांकि सरकार ने अभी कोई आधिकारिक नंबर तय नहीं किया है लेकिन एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इस बार यह फिटमेंट फैक्टर 2.28 से लेकर 3.83 के बीच कुछ भी तय हो सकता है।
जानें पहले कैसे तय होती थी सैलरी?
आज के समय में भले ही वेतन वृद्धि का मुख्य आधार 'फिटमेंट फैक्टर' बन गया है लेकिन पहले ऐसा नहीं था। पहले से लेकर पांचवें वेतन आयोग तक सैलरी बढ़ाने का कोई एक फिक्स फॉर्मूला नहीं था। तब वेतन संशोधन के लिए काफी जटिल तरीके अपनाए जाते थे जैसे वेतन का युक्तिकरण (Pay Rationalization), महंगाई भत्ते (DA) का बेसिक सैलरी में विलय करना और आवश्यकता-आधारित मजदूरी (Need-based Wage) की गणना करना। भले ही समय के साथ तरीके बदल गए हों लेकिन मुख्य उद्देश्य हमेशा एक ही रहा है कर्मचारियों की सैलरी को उस समय की महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों के अनुकूल बनाना।
वहीं इस बड़े फैसले का देश की अर्थव्यवस्था और समाज पर व्यापक असर पड़ेगा। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों से देश के 1.1 करोड़ (11 मिलियन) से अधिक लाभार्थी सीधे प्रभावित होंगे। इसमें वर्तमान केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी दोनों शामिल हैं।आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में पहले वेतन आयोग की स्थापना आजादी से पहले जनवरी 1946 में हुई थी और तब से अब तक कुल 7 वेतन आयोग आ चुके हैं। अब 8वें वेतन आयोग की यह अंतिम रिपोर्ट अगले एक दशक (10 साल) के लिए सरकारी कर्मचारियों की वित्तीय स्थिति की दिशा तय करेगी।