Edited By Ramkesh,Updated: 12 Jul, 2026 02:52 PM

छत्तीसगढ़ में पिछले 24 घंटों के दौरान अधिकांश क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई, जबकि सरगुजा संभाग में बारिश का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक रहा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने रविवार को सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर और जशपुर जिलों के लिए यलो...
नेशनल डेस्क: छत्तीसगढ़ में पिछले 24 घंटों के दौरान अधिकांश क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई, जबकि सरगुजा संभाग में बारिश का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक रहा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने रविवार को सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर और जशपुर जिलों के लिए यलो अलटर् जारी करते हुए अगले कुछ दिनों में उत्तर छत्तीसगढ़ में वर्षा गतिविधियों के और तेज होने की संभावना जताई है।

मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 13 जुलाई से वर्षा की तीव्रता बढ़ सकती है तथा कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका भी है। विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों तथा बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचने की सलाह दी है। हालांकि प्रदेश में हाल के दिनों में वर्षा का सिलसिला बना है, लेकिन मानसून अब भी सामान्य से पीछे चल रहा है। एक जून से 11 जुलाई तक राज्य में 252.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 320.6 मिमी होनी चाहिए थी। इस प्रकार प्रदेश में अब तक 21 प्रतिशत कम बारिश रिकॉडर् की गई है। पिछले 24 घंटों के दौरान सरगुजा संभाग के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा हुई, जबकि बस्तर संभाग के कुछ क्षेत्रों में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई। इसके बावजूद पूरे मानसून सीजन के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश अब भी वर्षा के सामान्य स्तर से पीछे है।

प्रदेश का सर्वाधिक अधिकतम तापमान दुर्ग में 33.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 23.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉडर् किया गया। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना व्यक्त की है। कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है। विभाग के अनुसार वर्तमान में दो प्रमुख मौसमी तंत्र सक्रिय हैं। पहला ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर तथा दूसरा उत्तर-पश्चिम बिहार एवं उससे लगे क्षेत्रों में बना हुआ है। इन दोनों प्रणालियों के प्रभाव से बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाएं मध्य भारत और विशेष रूप से छत्तीसगढ़ तक पहुंच रही हैं, जिससे बादलों का निर्माण और वर्षा की गतिविधियां बनी हुई हैं।
विभाग का अनुमान है कि 13 जुलाई से इन प्रणालियों का प्रभाव और बढ़ेगा, जिससे वर्षा में वृद्धि हो सकती है। राजधानी रायपुर में रविवार को दिनभर बादल छाए रहने, बीच-बीच में वर्षा होने तथा गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की संभावना है। शहर का अधिकतम तापमान लगभग 34 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। राज्य में 32 जिलों में से 16 जिले अब भी वर्षा की कमी से जूझ रहे हैं। 14 जिलों में वर्षा सामान्य श्रेणी में रही, जबकि एक जिले में अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई। सारंगढ़-बिलाईगढ़ प्रदेश का एकमात्र जिला है जहां 462.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि सामान्य वर्षा 265.7 मिमी होती है। यहां 74 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉडर् की गई।
वहीं मुंगेली में 331.8 मिमी वर्षा हुई, जो सामान्य से 21 प्रतिशत अधिक है। अन्य जिलों में बालोद में चार प्रतिशत अधिक , बलौदाबाजार में नौ प्रतिशत अधिक , बलरामपुर में छह प्रतिशत अधिक , दंतेवाड़ा में 14 प्रतिशत अधिक, दुर्ग में चार प्रतिशत कम , गरियाबंद में चार प्रतिशत कम , जांजगीर-चांपा में 13 प्रतिशत अधिक , खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 11 प्रतिशत अधिक , कोरबा 14 प्रतिशत कम , महासमुंद आठ प्रतिशत अधिक , नारायणपुर में दस प्रतिशत कम , रायपुर आठ प्रतिशत अधिक , राजनांदगांव 13 प्रतिशत की कमी , सक्ती 11 प्रतिशत अधिक तथा बिलासपुर में 19 प्रतिशत कम वर्षा सामान्य अथवा सामान्य के आसपास दर्ज की गई। उत्तर छत्तीसगढ़ वर्षा की कमी से सबसे अधिक प्रभावित है। सरगुजा में 54 प्रतिशत, जशपुर में 42 प्रतिशत, सूरजपुर में 30 प्रतिशत, कोरिया में 39 प्रतिशत तथा मनेन्द्रगढ़-भरतपुर में 29 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। बस्तर संभाग में भी सामान्य से कम वर्षा हुई है। बस्तर में 27 प्रतिशत, बीजापुर में 20 प्रतिशत, कोंडागांव में 34 प्रतिशत तथा सुकमा में 32 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉडर् की गई, जबकि दंतेवाड़ा और नारायणपुर की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही।
मौसम विभाग का कहना है कि जुलाई का पहला पखवाड़ा खरीफ फसलों की बुआई के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। जिन जिलों में वर्षा सामान्य से कम हुई है, वहां धान सहित अन्य खरीफ फसलों की बुआई और प्रारंभिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है। विभाग का मानना है कि यदि 13 से 15 जुलाई के बीच अनुमान के अनुरूप अच्छी वर्षा होती है तो खेतों में पर्याप्त नमी पहुंचेगी और किसानों को राहत मिलेगी।