Edited By Tanuja,Updated: 07 Jun, 2026 06:32 PM

एलन मस्क ने भारत की घटती जन्मदर को लेकर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) के अनुसार भारत की कुल प्रजनन दर 2.1 के रिप्लेसमेंट स्तर से गिरकर 1.9 पर पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुझान जारी रहा तो भविष्य में बुजुर्ग...
International Desk: भारत की तेजी से घटती जन्मदर को लेकर एलन मस्क (Elon Musk) ने चिंता व्यक्त की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक संदेश में उन्होंने कहा कि भारत की प्रजनन दर अब उस स्तर से नीचे पहुंच चुकी है, जिसे किसी देश की आबादी को लंबे समय तक स्थिर बनाए रखने के लिए आवश्यक माना जाता है। मस्क ने यह भी कहा कि शिक्षित वर्ग में यह गिरावट काफी पहले से देखी जा रही थी और अब इसका प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई देने लगा है।
क्या कहते हैं आंकड़े?
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की 2025 विश्व जनसंख्या स्थिति रिपोर्ट के अनुसार भारत की कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate-TFR) घटकर 1.9 जन्म प्रति महिला रह गई है। एक दशक पहले यह दर लगभग 2.3 थी। यानी सिर्फ 10 वर्षों में इसमें उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार देश की कुछ महानगरों और शहरी क्षेत्रों में यह दर और भी कम हो चुकी है। राजधानी दिल्ली में यह आंकड़ा लगभग 1.2 बताया जा रहा है, जो कई विकसित देशों के स्तर के बराबर या उससे भी कम है।
क्या होता है रिप्लेसमेंट लेवल?
रिप्लेसमेंट लेवल वह न्यूनतम जन्मदर होती है जो किसी देश की आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी मानी जाती है।आमतौर पर यह दर 2.1 मानी जाती है। इसका मतलब है कि औसतन प्रत्येक महिला के 2.1 बच्चे होने चाहिए ताकि एक पीढ़ी अपनी अगली पीढ़ी द्वारा पूरी तरह प्रतिस्थापित हो सके। यदि यह दर लंबे समय तक 2.1 से नीचे रहती है, तो भविष्य में आबादी घटने लगती है और उम्रदराज लोगों का अनुपात बढ़ जाता है।
दुनिया की सबसे बड़ी आबादी लेकिन
भारत की आबादी वर्तमान में लगभग 1.46 अरब से अधिक है। वर्ष 2023 में भारत ने China को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बनने का स्थान हासिल किया था। हालांकि आबादी अभी भी बड़ी है, लेकिन जन्मदर में लगातार गिरावट यह संकेत दे रही है कि आने वाले दशकों में जनसंख्या वृद्धि की गति काफी धीमी हो सकती है।
क्यों घट रही जन्मदर ?
- विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं:
- महिलाओं की शिक्षा में वृद्धि
- शहरीकरण का विस्तार
- करियर पर बढ़ता ध्यान
- परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता
- विवाह की बढ़ती औसत आयु
- बच्चों के पालन-पोषण की बढ़ती लागत
- परिवार पहले की तुलना में कम बच्चे पैदा करना पसंद कर रहे हैं।
- स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार का भी असर
रिपोर्ट के अनुसार भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं। हालांकि मातृ मृत्यु दर, लैंगिक असमानता, बाल विवाह और कम उम्र में गर्भधारण जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में इन मुद्दों पर अभी भी काम किए जाने की जरूरत है। यदि जन्मदर में गिरावट का मौजूदा रुझान जारी रहता है, तो आने वाले दशकों में भारत को कई नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है:
- बुजुर्ग आबादी में तेजी से वृद्धि
- कामकाजी उम्र की आबादी का अनुपात कम होना
- श्रमशक्ति की संभावित कमी
- पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ता दबाव
- आर्थिक विकास की रफ्तार पर प्रभाव
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भारत अभी "जनसांख्यिकीय लाभांश" (Demographic Dividend) के दौर में है, क्योंकि देश में युवाओं की संख्या अभी भी बहुत बड़ी है। इसलिए आने वाले वर्षों में शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार सृजन पर ध्यान देकर इस अवसर का लाभ उठाया जा सकता है। भारत लंबे समय तक जनसंख्या विस्फोट की चर्चा के केंद्र में रहा है। लेकिन अब बहस का विषय तेजी से बदल रहा है। कई विकसित देशों की तरह भारत में भी जन्मदर में गिरावट भविष्य की आर्थिक और सामाजिक नीतियों को प्रभावित कर सकती है।इसी वजह से एलन मस्क समेत कई वैश्विक विशेषज्ञ दुनिया के विभिन्न देशों में घटती जन्मदर को आने वाले समय की बड़ी चुनौती मान रहे हैं।