Edited By Anu Malhotra,Updated: 13 Jan, 2026 01:47 PM

म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जिस SIP (सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान) को अब तक अमीरी का पक्का रास्ता माना जाता था, अब उसी रास्ते से निवेशक अपने कदम पीछे खींचते दिख रहे हैं। हालिया आंकड़ों ने वित्तीय...
नेशनल डेस्क: म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जिस SIP (सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान) को अब तक अमीरी का पक्का रास्ता माना जाता था, अब उसी रास्ते से निवेशक अपने कदम पीछे खींचते दिख रहे हैं। हालिया आंकड़ों ने वित्तीय विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग अपनी चालू किस्तों को या तो रोक रहे हैं या समय से पहले पूरा पैसा निकाल रहे हैं।
दिसंबर 2025: आंकड़ों में गिरावट का संकेत
AMFI (म्यूचुअल फंड संस्था) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 में Equity Funds में होने वाला शुद्ध निवेश गिरकर ₹28,000 करोड़ पर आ गया है। यह नवंबर की तुलना में काफी कम है। इतना ही नहीं, डेट फंड्स (सुरक्षित माने जाने वाले फंड) से भी पैसा निकालने की होड़ मची है। इसका सीधा असर पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग की कुल संपत्ति यानी AUM पर पड़ा है, जो अब पहले के मुकाबले घट गई है।
क्यों थम रही है SIP की रफ्तार? (प्रमुख कारण)
सिर्फ शेयर बाजार का डर ही इसकी वजह नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई छिपे हुए पहलू हैं:
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मैच्योरिटी का पूरा होना: एक बड़ा हिस्सा उन निवेशकों का है जिनकी SIP की समय सीमा (3, 5 या 7 साल) पूरी हो गई। कई लोगों ने इसे रिन्यू (आगे जारी) नहीं किया, जिससे तकनीकी तौर पर बंद होने वाली SIP की संख्या बढ़ गई।
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बाजार की अस्थिरता: पिछले कुछ महीनों में शेयर मार्केट में आए उतार-चढ़ाव ने नए निवेशकों को डरा दिया है। जिन्होंने हाल ही में निवेश शुरू किया था, वे मनचाहा मुनाफा न देख घबराहट में बाहर निकल रहे हैं।
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तुरंत मुनाफे की चाहत: सोशल मीडिया के दौर में लोग SIP को 'अलादीन का चिराग' समझ बैठे हैं। जब कुछ महीनों में भारी रिटर्न नहीं मिलता, तो धैर्य जवाब दे जाता है। लोग यह भूल जाते हैं कि SIP का असली जादू 'कंपाउंडिंग' में है, जो लंबे समय बाद दिखता है।
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मार्केट टाइमिंग का भ्रम: कुछ चतुर निवेशक सोचते हैं कि जब बाजार गिरेगा तब पैसा लगाएंगे और अभी ऊंचे भाव पर रुक जाते हैं। हकीकत में बाजार के बॉटम को पकड़ पाना नामुमकिन है और इस चक्कर में वे अच्छे रिटर्न का मौका गंवा देते हैं।
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घरेलू बजट और महंगाई: बढ़ती EMI, बच्चों की शिक्षा का खर्च और स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ता दबाव भी एक बड़ी वजह है। जब जेब पर बोझ बढ़ता है, तो आम आदमी सबसे पहले अपने निवेश की किस्त ही रोकता है।
SIP बंद करना समझदारी या जल्दबाजी?
म्यूचुअल फंड विशेषज्ञों का मानना है कि SIP को रोकना अक्सर एक गलत फैसला साबित होता है, खासकर तब जब बाजार नीचे हो। निवेश को 'खर्च' के बजाय 'भविष्य की बचत' समझना जरूरी है। यदि आप भी अपनी SIP बंद करने की सोच रहे हैं, तो याद रखें कि अनुशासित निवेश ही लंबी अवधि में बड़ी पूंजी बनाने का एकमात्र साधन है।