Edited By SHUKDEV PRASAD,Updated: 11 Mar, 2026 11:18 PM

देश में कमर्शियल गैस की कमी और सप्लाई में अनियमितता का असर अब राजनीतिक दफ्तरों में भी दिखाई देने लगा है।
नेशनल डेस्क: देश में कमर्शियल गैस की कमी और सप्लाई में अनियमितता का असर अब राजनीतिक दफ्तरों में भी दिखाई देने लगा है। Indian National Congress के 24 Akbar Road Congress Headquarters स्थित कैंटीन में एलपीजी की सीमित उपलब्धता के कारण मेन्यू में बदलाव करना पड़ा है।कैंटीन प्रबंधन ने ज्यादा गैस खपत वाले कई व्यंजनों को फिलहाल बंद कर दिया है ताकि उपलब्ध ईंधन का इस्तेमाल जरूरी भोजन तैयार करने में किया जा सके।
डोसा-उत्तपम जैसे आइटम मेन्यू से हटे
कैंटीन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक जिन व्यंजनों को लगातार तेज आंच और अधिक गैस की जरूरत होती है—जैसे डोसा, उत्तपम और अन्य तवे पर बनने वाले साउथ इंडियन आइटम—उन्हें अस्थायी रूप से मेन्यू से हटा दिया गया है।
फिलहाल कैंटीन में दाल-चावल, सब्जी, रोटी और कुछ हल्के नाश्ते जैसे सीमित विकल्प ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रबंधन का कहना है कि यह कदम गैस की बचत और सप्लाई की अनिश्चितता को देखते हुए उठाया गया है।
कार्यकर्ताओं के लिए सस्ती कैंटीन
कांग्रेस मुख्यालय की यह कैंटीन लंबे समय से पार्टी नेताओं, कर्मचारियों और कार्यकर्ताओं को किफायती दरों पर भोजन उपलब्ध कराती रही है। यहां दक्षिण भारतीय व्यंजनों की काफी मांग रहती थी, लेकिन मौजूदा गैस संकट के कारण स्थिति बदल गई है।
जानकारों का कहना है कि गैस की कमी का असर सिर्फ राजनीतिक कार्यालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई शहरों में होटल और छोटे रेस्टोरेंट भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।
केंद्र सरकार पर कांग्रेस का हमला
गैस संकट को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने Narendra Modi सरकार पर आरोप लगाया कि गलत नीतियों के कारण एलपीजी की उपलब्धता और कीमतों से जुड़ी समस्या पैदा हुई है। कांग्रेस का कहना है कि गैस की कीमतों और सप्लाई के मुद्दे पर सरकार को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए और आम लोगों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
विरोध प्रदर्शन और FIR का मुद्दा
इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस की महिला इकाई ने भी विरोध जताया है। Alka Lamba के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और महिलाओं पर बढ़ते गैस खर्च का मुद्दा उठाया।
पार्टी का आरोप है कि प्रदर्शन के बाद महिला कांग्रेस की नेताओं और कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज की गई, जिसे उन्होंने लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की कोशिश बताया।