Edited By Mehak,Updated: 02 Mar, 2026 06:47 PM

PCOD (Polycystic Ovarian Disease) और PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) महिलाओं में आम हार्मोनल समस्याएं हैं, जिनमें अंडाशय में छोटे-छोटे सिस्ट बनते हैं और अंडे सही समय पर रिलीज नहीं होते। इसके मुख्य लक्षण हैं अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ना, चेहरे पर...
नेशनल डेस्क : आजकल कम उम्र की लड़कियों और महिलाओं में PCOD (Polycystic Ovarian Disease) और PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) की समस्या बहुत आम हो गई है। यह एक तरह की हार्मोनल समस्या है, जिसमें महिलाओं के अंडाशय में छोटे-छोटे सिस्ट या गांठ बनने लगते हैं, जिससे अंडा सही समय पर रिलीज़ नहीं हो पाता। इसके कारण पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं, वजन बढ़ सकता है, चेहरे पर पिंपल्स और अनचाहे बाल आ सकते हैं। कुछ महिलाओं को सिर में दर्द या खाने की इच्छा कम होने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
PCOD और PCOS में क्या अंतर है
PCOD और PCOS दोनों ही महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याएं हैं, लेकिन PCOD हल्की स्थिति मानी जाती है जबकि PCOS गंभीर हार्मोनल सिंड्रोम है। PCOS में हार्मोनल असंतुलन के कई लक्षण एक साथ दिखाई देते हैं और यह लंबे समय तक गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
PCOD/PCOS के मुख्य लक्षण
1. पीरियड्स का अनियमित होना
2. वजन तेजी से बढ़ना
3. चेहरे पर पिंपल्स और ऑयली स्किन
4. चेहरे या शरीर पर अनचाहे बाल
5. बालों का झड़ना
6. गर्भधारण में कठिनाई
यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।
PCOD/PCOS के रूट कॉज
आयुर्वेद के अनुसार, यह सिर्फ हार्मोनल गड़बड़ी नहीं है, बल्कि गलत लाइफस्टाइल और खानपान इसका मुख्य कारण हैं।
- इंसुलिन रेजिस्टेंस : जंक फूड, अधिक मीठा या रिफाइंड आटे का सेवन शरीर में इंसुलिन संतुलन बिगाड़ देता है।
- स्ट्रेस : लगातार मानसिक तनाव, देर रात जागना, मोबाइल का अधिक इस्तेमाल और नींद की कमी हार्मोन असंतुलन पैदा कर सकते हैं।
- शारीरिक गतिविधि की कमी : लंबे समय तक बैठे रहना और एक्सरसाइज न करना ओवरी की सेहत पर नकारात्मक असर डालता है।
- खराब पाचन तंत्र : आयुर्वेद के अनुसार शरीर में टॉक्सिन का बढ़ना और पाचन की कमजोरी हार्मोनल असंतुलन को बढ़ावा देता है।
रोकथाम और देखभाल
PCOD और PCOS को नियंत्रित करने के लिए संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव कम करना बेहद जरूरी है। आयुर्वेदिक उपाय और जीवनशैली में बदलाव से हार्मोन संतुलन बनाए रखा जा सकता है और कई लक्षणों को कम किया जा सकता है। यदि समय पर देखभाल की जाए तो महिलाएं सामान्य जीवन जी सकती हैं और गर्भधारण की समस्या को भी कम किया जा सकता है।