Edited By Rohini Oberoi,Updated: 12 Jul, 2026 09:56 AM
भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने देश भर में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण बदलाव किया है। चुनाव आयोग ने नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में एक नया सेक्शन...
Election Commission SIR Form : भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने देश भर में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण बदलाव किया है। चुनाव आयोग ने नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में एक नया सेक्शन जोड़ दिया है। इस नए सेक्शन के तहत अब आवेदकों से उनके माता-पिता या परिवार के पूर्व चुनावी इतिहास की जानकारी मांगी जा रही है।
जानकारी के लिए बता दें कि चुनाव आयोग द्वारा चल रहे अभियान के बीच में यह कदम उठाने के पीछे पिछले अनुभवों और उपजे विवादों को बड़ी वजह माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में चलाए गए SIR अभियान के बाद करीब 5.58 करोड़ से ज्यादा लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे।
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इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का असर उनके बच्चों पर भी पड़ा। उदाहरण के लिए पश्चिम बंगाल में अप्रैल 2026 में हुए विधानसभा चुनाव से ठीक पहले करीब 27 लाख वोटरों के नाम लिस्ट से कट गए जिससे वे मतदान नहीं कर पाए और उनकी शिकायतें अब भी लंबित हैं। इसी तरह की दिक्कतों को दूर करने के लिए यह नया सेक्शन जोड़ा गया है।
फॉर्म-6 में जुड़े 3 नए विकल्प
ECINET पोर्टल पर सामने आए नए फॉर्म के मुताबिक आवेदकों को अब एक नए डिक्लेरेशन (घोषणा पत्र) में तीन में से किसी एक विकल्प को चुनना होगा:
पहला विकल्प: मेरा नाम पिछली SIR की वोटर लिस्ट में शामिल है।
दूसरा: मेरे माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR की वोटर लिस्ट में है।
तीसरा: न तो मेरा नाम और न ही मेरे माता-पिता का नाम पिछली वोटर लिस्ट में है।
यदि कोई आवेदक पहले दो विकल्पों में से किसी एक को चुनता है तो उसे अपनी विधानसभा सीट का नाम, बूथ नंबर और पिछली वोटर लिस्ट में दर्ज सीरियल नंबर की पूरी जानकारी देनी होगी। वहीं तीसरा विकल्प चुनने की स्थिति में आगे क्या प्रक्रिया होगी इसके बारे में फॉर्म में स्पष्ट नहीं किया गया है। हालांकि यह नया सेक्शन वैकल्पिक (Optional) नहीं है इसे भरे बिना ऑनलाइन फॉर्म सबमिट नहीं हो पा रहा है।
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जानें किन लोगों के लिए होता है फॉर्म-6?
वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 का इस्तेमाल मुख्य रूप से तीन परिस्थितियों में किया जाता है। जो युवा हाल ही में 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं और पहली बार वोटर बन रहे हैं। ऐसे भारतीय नागरिक जो विदेश से लौटे हों या नागरिकता मिलने के बाद देश के वैध मतदाता बनना चाहते हों। ऐसे लोग जिनका नाम किसी वजह से वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था और वे दोबारा अपना नाम जुड़वाना चाहते हैं।
बता दें कि चुनाव आयोग ने फरवरी 2026 में देश के 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR कराने का एलान किया था जहां अप्रैल 2026 से यह प्रक्रिया जोर-शोर से चल रही है। आंध्र प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, ओडिशा, झारखंड, तेलंगाना, उत्तराखंड, लद्दाख, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा में काम जारी है जबकि बिहार में यह काम पूरा हो चुका है।
इससे पहले साल 2025 में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, गुजरात, केरल, गोवा, पुडुचेरी, अंडमान निकोबार और लक्षद्वीप में SIR प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।