बारिश पर भी जुआ: जब बादलों की गरज तय करती है हार और जीत, भारत के वो सट्टे जिनके बारे में आपने नहीं सुना होगा

Edited By Updated: 30 Apr, 2026 10:16 AM

not just cricket betting is done on everything from rain to box office in india

भारत में सट्टेबाजी का जाल क्रिकेट के मैदान और चुनावी गलियारों से कहीं आगे निकल चुका है। हाल ही में रिलीज हुई वेब सीरीज 'Matka King' ने एक बार फिर उस दौर और उस व्यवस्था की याद दिला दी है जहां नंबरों के खेल पर लोगों की किस्मत दांव पर लगी होती थी लेकिन...

Mumbai Satta Bazaar : भारत में सट्टेबाजी का जाल क्रिकेट के मैदान और चुनावी गलियारों से कहीं आगे निकल चुका है। हाल ही में रिलीज हुई वेब सीरीज 'Matka King' ने एक बार फिर उस दौर और उस व्यवस्था की याद दिला दी है जहां नंबरों के खेल पर लोगों की किस्मत दांव पर लगी होती थी लेकिन हकीकत में देश के कई हिस्सों में आज भी ऐसी चीजों पर सट्टा लगाया जाता है जिनके बारे में सुनकर कोई भी दंग रह जाए। आपको जानकारी के लिए बता दें कि देश के ग्रामीण और कुछ शहरी इलाकों में मानसून के दौरान बारिश पर सट्टा लगाने का चलन है। यहां मौसम विभाग के आंकड़ों से ज्यादा देसी पैमानों पर भरोसा किया जाता है।

बता दें कि सट्टेबाज ‘छपरा’, ‘नाला’, ‘बाड़ा’ और ‘नदी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। यदि किसी ने 'नाला' पर दांव लगाया है तो शर्त तभी जीती मानी जाएगी जब बारिश इतनी तेज हो कि नाले का पानी उफनकर बाहर बहने लगे। इसी तरह 'छपरा' (खपरैल की छत) से पानी गिरने की रफ्तार पर भी दांव लगाए जाते हैं। मुंबई जैसे बड़े शहरों में फिल्मों की रिलीज किसी जुए से कम नहीं होती। यहां सट्टेबाज केवल फिल्म के हिट या फ्लॉप होने पर नहीं बल्कि:

ओपनिंग डे कलेक्शन: फिल्म पहले दिन कितने करोड़ कमाएगी।

वीकेंड बिजनेस: क्या फिल्म 100 करोड़ क्लब में शामिल होगी।

सेलेब्रिटी लाइफ: यहां तक कि किसी बड़े सेलेब्रिटी के घर 'बेटा' होगा या 'बेटी'—इस पर भी करोड़ों के दांव लग जाते हैं।

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आंध्र प्रदेश और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में त्योहारों (जैसे संक्रांति) के दौरान मुर्गों की लड़ाई (Cockfighting) और सांडों की लड़ाई पर भारी सट्टा लगाया जाता है। इन मुकाबलों में न केवल हार-जीत पर बल्कि इस पर भी पैसा लगाया जाता है कि कौन सा जानवर कितनी देर तक टिकेगा। हालांकि इनमें से कई गतिविधियां कानूनी रूप से प्रतिबंधित हैं फिर भी चोरी-छिपे इनका बड़ा बाजार चलता है।

अंत में कहा जा सकता है कि आज के दौर में सट्टा अब केवल गलियों तक सीमित नहीं है। 'मटका किंग' के जमाने के पर्ची वाले खेल की जगह अब मोबाइल ऐप्स और टेलीग्राम ग्रुप्स ने ले ली है। तकनीक के जरिए ये सट्टेबाज दुनिया के किसी भी कोने से किसी भी अजीब चीज पर दांव लगवा लेते हैं।

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