Edited By jyoti choudhary,Updated: 20 Apr, 2026 04:47 PM

हाल के महीनों में सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी और जनवरी में यह रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था। हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रम के बाद कीमतों में कुछ नरमी आई है।
बिजनेस डेस्कः हाल के महीनों में सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी और जनवरी में यह रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था। हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रम के बाद कीमतों में कुछ नरमी आई है।
ग्लोबल स्तर पर सोने की मांग में उभरते बाजारों (एमर्जिंग मार्केट्स) की बड़ी भूमिका है। पिछले एक दशक में कुल मांग का लगभग 70% हिस्सा इन्हीं बाजारों से आया है। इसमें China करीब 27% हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर है, जबकि India 21% हिस्सेदारी के साथ दूसरे नंबर पर है यानी इन दोनों देशों का वैश्विक मांग में लगभग आधा योगदान है।
अन्य क्षेत्रों की बात करें तो उत्तरी अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 11% और यूरोप (रूस सहित) की करीब 12% है। वहीं मिडिल ईस्ट का योगदान 7% और साउथ ईस्ट एशिया का 10% है। सोने की इस मांग में जूलरी, बार, कॉइन, ईटीएफ और टेक्नोलॉजी सेक्टर की खपत शामिल है।
सप्लाई साइड पर नजर डालें तो सोने की कुल आपूर्ति का लगभग 74% हिस्सा खनन (माइन प्रोडक्शन) से आता है, जबकि बाकी 26% रिसाइक्लिंग के जरिए पूरा किया जाता है। क्षेत्रीय स्तर पर अफ्रीका 26% योगदान के साथ सबसे बड़ा सप्लायर है, इसके बाद एशिया (19%) का स्थान है। सेंट्रल और साउथ अमेरिका तथा पूर्व सोवियत देशों की हिस्सेदारी करीब 15-15% है।
देशों के हिसाब से सोना उत्पादन में China शीर्ष पर है, इसके बाद रूस, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और United States जैसे देश आते हैं।