Edited By Tanuja,Updated: 10 Jun, 2026 08:00 PM

अमेरिका में 11 साल बिताने वाले एक भारतीय मूल के व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर खुलासा किया कि वह करियर में आई रुकावटों के बावजूद भारत लौटना चाहता था, लेकिन रिश्तेदारों और समाज के तानों के डर ने उसे रोक रखा था। आखिरकार उसने महसूस किया कि लोग उतना नहीं...
International Desk: अमेरिका में 11 साल बिताने वाले एक भारतीय मूल के व्यक्ति (NRI) की सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों खूब चर्चा में है। उसने बताया कि दो मास्टर्स डिग्रियां हासिल करने और वर्षों तक अमेरिका में रहने के बावजूद उसका करियर उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ पाया। हालांकि, भारत लौटने से उसे आर्थिक या व्यावहारिक परेशानियों का डर नहीं था, बल्कि उसे इस बात की चिंता सताती रही कि रिश्तेदार, दोस्त और समाज उसके बारे में क्या सोचेंगे। अपनी वायरल पोस्ट में उसने लिखा:"11 साल अमेरिका में बिताने, दो मास्टर्स डिग्री लेने और करियर को धीरे-धीरे रुकते देखने के बाद मुझे एक बेहद साधारण बात समझ आई। मैं हमेशा इस चिंता में डूबा रहा कि मेरे लौटने पर रिश्तेदार क्या कहेंगे और मेरे बारे में कैसी कहानियां बनाई जाएंगी।"
पुराने दोस्त से मुलाकात ने बदली सोच
‘मैंने खुद ही अपने दिमाग में अदालत बना ली थी’। NRI ने बताया कि करियर में आई असफलताओं और निराशाओं के कारण उसने कई पुराने दोस्तों से भी दूरी बना ली थी। उसे लगता था कि लोग उसकी प्रगति का मूल्यांकन कर रहे हैं और उसे असफल समझ रहे हैं। लेकिन हाल ही में एक पुराने दोस्त से मुलाकात ने उसकी सोच बदल दी। उसने लिखा:"जिस दोस्त से मैं वर्षों दूर रहा, उसने मुझे जज नहीं किया। वह सिर्फ इस बात से दुखी था कि मैं अचानक उसकी जिंदगी से गायब हो गया था। तब मुझे एहसास हुआ कि मेरे दिमाग में जो अदालत चल रही थी, वह वास्तव में कहीं थी ही नहीं। मैं खुद ही जज था, खुद ही जूरी और खुद ही जल्लाद।" ‘लोग उतना नहीं सोचते जितना हम समझते हैं’।

उस व्यक्ति का कहना है कि हम अक्सर यह मान लेते हैं कि हर कोई हमारी असफलताओं और फैसलों पर नजर रख रहा है, जबकि हकीकत में अधिकांश लोग अपनी जिंदगी में व्यस्त होते हैं। उसने लिखा कि "लोग आपको उतनी बारीकी से नहीं देखते जितना आप सोचते हैं। और जो कुछ लोग टिप्पणी करते भी हैं, वे कुछ दिनों बाद उसे भूल जाते हैं। जब यह बात समझ में आती है, तो डर खत्म होने लगता है और आजादी का एहसास होता है।" NRI ने बताया कि वह अब भारत लौटने की तैयारी कर रहा है और पहली बार उसे इस बात की चिंता नहीं है कि लोग क्या कहेंगे। उसने कहा कि "मैं अब भारत लौट रहा हूं। जब मैं उतरूंगा तो लोग शायद एक-दो दिन कुछ सोचें या कहें, लेकिन फिर वे अपनी जिंदगी में व्यस्त हो जाएंगे और मैं अपनी जिंदगी जीऊंगा।"
इस पोस्ट पर हजारों लोगों ने दी प्रतिक्रिया
इस पोस्ट पर हजारों लोगों ने प्रतिक्रिया दी और कई प्रवासी भारतीयों ने अपने अनुभव साझा किए। एक यूजर ने लिखा कि "यह जिंदगी का कठिन लेकिन जरूरी सबक है। खुशी है कि आपने इसे समझ लिया।" दूसरे यूजर ने कहा कि "स्वागत है भाई। मैं भी वर्षों विदेश में रहने के बाद भारत लौटा था। शुरुआत में मुझे भी डर था, लेकिन परिवार और दोस्तों ने खुले दिल से अपनाया।" एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि वह भी लगभग 11 साल विदेश में रहने के बाद हाल ही में भारत लौटा है और भावनात्मक रूप से कई उतार-चढ़ाव का सामना कर रहा है, लेकिन धीरे-धीरे सब सामान्य हो रहा है।
विदेश लौटने वालों और वापस आने वालों की साझा दुविधा
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश में रहने वाले कई भारतीयों के सामने यह मनोवैज्ञानिक दबाव होता है कि यदि वे अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाए और वापस लौटे, तो समाज उन्हें असफल समझेगा। यही वजह है कि कई लोग अपनी वास्तविक परिस्थितियों के बावजूद वापसी का फैसला टालते रहते हैं। इस वायरल पोस्ट ने एक बार फिर यह चर्चा छेड़ दी है कि सफलता की परिभाषा केवल विदेश में बस जाना या ऊंची तनख्वाह पाना नहीं है, बल्कि मानसिक शांति, पारिवारिक जुड़ाव और व्यक्तिगत संतुष्टि भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।