Edited By Tanuja,Updated: 29 Jul, 2026 04:02 PM

अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए विदेशी निर्मित ह्यूमनॉइड रोबोट, रोबोटिक डॉग और कुछ अन्य उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले का सबसे बड़ा असर चीन पर पड़ सकता है, जिसकी वैश्विक ह्यूमनॉइड रोबोट बाजार में लगभग 85 प्रतिशत...
Washington: अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए विदेशी निर्मित ह्यूमनॉइड रोबोट के आयात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। अमेरिकी संघीय संचार आयोग (FCC) के इस फैसले को चीन की तेजी से बढ़ती रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षमता पर अंकुश लगाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अमेरिका ने तर्क दिया है कि ऐसे रोबोट राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। इस फैसले से दुनिया की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच संबंधों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि अत्याधुनिक तकनीक की दौड़ तेज हो रही है। चीन अमेरिका और अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में काफी अधिक ह्यूमनॉइड रोबोट बनाता है। विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक बाजार में चीनी ह्यूमनॉइड रोबोट की हिस्सेदारी करीब 85 प्रतिशत तक पहुंच गई है। ह्यूमनॉइड रोबोट एक ऐसा कृत्रिम यंत्र या रोबोट है, जिसकी शारीरिक संरचना और रूप-रंग बिल्कुल मनुष्यों जैसे होते हैं।
इनमें आमतौर पर एक सिर, धड़, दो हाथ और दो पैर होते हैं। ये मानवनुमा रोबोट सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से मनुष्यों की तरह चल-फिर सकते हैं और काम कर सकते हैं। एफसीसी के प्रतिबंध में नए ह्यूमनॉइड रोबोट के आयात के साथ-साथ चार पैरों वाले रोबोट (जिन्हें आमतौर पर रोबोटिक डॉग कहा जाता है) और विदेशों में निर्मित पावर इनवर्टर भी शामिल हैं। एफसीसी ने कहा कि विदेशी देशों में निर्मित ये उन्नत रोबोट अमेरिका की आपूर्ति श्रृंखला में कमजोरियां पैदा कर सकते हैं और इनके कारण साइबर सुरक्षा तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं। एफसीसी के अध्यक्ष ब्रेंडन कैर ने एक बयान में कहा कि यह कदम ''अमेरिका की महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने'' के उद्देश्य से उठाया गया है।
अमेरिका पहले भी चीनी तकनीक को सीमित करने के लिए कई कदम उठा चुका है। इनमें चीन निर्मित ड्रोन के आयात पर प्रतिबंध शामिल है। इसके अलावा अमेरिका चीनी ओपन-सोर्स कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मॉडलों पर भी प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है, जबकि चीन की एआई तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है। चीन ने अपनी तकनीकी प्रगति का बचाव करते हुए कहा है कि यह दुनिया के लिए अवसर है, खतरा नहीं। अमेरिका समेत कई देश इस बात को लेकर चिंता जता रहे हैं कि चीन की बढ़ती औद्योगिक क्षमता उनकी अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान पहुंचा सकती है।