'एक तरफ बातचीत का न्योता, दूसरी ओर छात्रों पर लाठियां, सरकार की मंशा पर CJP ने उठाए सवाल

Edited By Updated: 21 Jul, 2026 06:27 PM

on one hand invitation for talks on the other lathi charge on students cj

कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने संगठन के साथ बातचीत शुरू करने की केंद्र सरकार की मंशा पर मंगलवार को सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ तो कॉजपा के साथ बातचीत कर रही है,

नेशनल डेस्क: कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने संगठन के साथ बातचीत शुरू करने की केंद्र सरकार की मंशा पर मंगलवार को सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ तो कॉजपा के साथ बातचीत कर रही है, वहीं दूसरी ओर वह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का सहारा ले रही है। दीपके ने नीट प्रश्नपत्र 'लीक' मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर 32 दिन से जारी विरोध-प्रदर्शन में शामिल समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, "सरकार ने हमारा समय बर्बाद किया। उसने हमारे प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित किया और उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए। आशुतोष रांका और सौरव दास को एक तरह से जेपी नड्डा के आवास पर नजरबंद कर दिया गया था।

 सरकार ने हमारा समय बर्बाद किया गया
दीपके ने आरोप लगाया, "पूरी योजना हमारी टीम को तितर-बितर करने की थी, ताकि जब अफरातफरी मचे तो कोई वहां मौजूद न हो। इसी वजह से उन्हें पांच घंटे तक बैठाए रखा गया और हमारा समय बर्बाद किया गया। एक तरफ आप बातचीत के लिए बुलाते हैं और दूसरी तरफ छात्रों पर लाठियां बरवाते हैं।" हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। केंद्र की ओर से स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने सोमवार को कॉजपा के दो प्रतिनिधियों के साथ पहली बार सीधी बातचीत की और उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार का शीर्ष नेतृत्व संगठन की मांगों पर आंतरिक स्तर पर चर्चा करेगा। यह बातचीत तब हुई, जब हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च करने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस ने उन्हें रोक दिया। 

हमें बस आश्वासन मिला
कॉजपा के मुताबिक, यह आश्वासन तब मिला, जब संगठन के प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास ने सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर काम कर रहे नड्डा से उनके आवास पर दो घंटे के भीतर दो बार मुलाकात की और अपनी मांगों से जुड़ा ज्ञापन सौंपा, जिनमें परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर शिक्षा मंत्री पद से प्रधान का इस्तीफा भी शामिल है। बैठक के बाद बातचीत में रांका ने कहा, "हमें बस यही आश्वासन मिला है कि वह नेतृत्व से बात करेंगे और हमें निष्कर्षों की जानकारी देंगे।" पुलिस कार्रवाई के एक दिन बाद मंगलवार को भारी सुरक्षा के बीच जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन जारी रहा। 

वांगचुक का अनशन गंभीर चिंता का विषय 
दीपके ने दावा किया कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक साथी प्रदर्शनकारियों के लगातार अनुरोध के बाद अपना अनशन खत्म करने के लिए मान गए थे, लेकिन 'संसद चलो' मार्च में शामिल लोगों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई देखने के बाद उन्होंने इसे जारी रखने का फैसला लिया है। प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर उस मंच पर डटे हुए हैं, जहां वांगचुक अनशन पर बैठे थे। उन्होंने मंच पर वांगचुक की तस्वीर के साथ संविधान और रामचरितमानस की एक-एक प्रति, एक चरखा और बुद्ध की एक छोटी प्रतिमा रखी है। दीपके ने कहा कि वांगचुक का लगातार जारी अनशन गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

पुलिस पर बर्बरता का लगाया आरोप 
दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर पर 28 जून से अनशन कर रहे वांगचुक को 18 जुलाई को प्रदर्शन स्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। हालांकि, सामाजिक कार्यकर्ता ने तरल पदार्थ लेने की डॉक्टरों की सलाह के बावजूद अस्पताल में भी अपना अनशन जारी रखा है। दीपके ने कहा, "सोनम वांगचुक कल अपना अनशन खत्म करने वाले थे। हमने उन्हें बहुत मुश्किल से मनाया था। हमने उनसे गुजारिश की थी कि उनकी जान इस देश के लिए बहुत कीमती है और उन्हें अपना अनशन खत्म कर देना चाहिए। वह किसी तरह मान भी गए थे, लेकिन पुलिस की बर्बरता देखकर उन्होंने अपना अनशन जारी रखने का फैसला किया है और यह बहुत गंभीर बात है।

वांगचुक की जान को खतरा हो सकता
कॉजपा संस्थापक ने कहा, "उनका (वांगचुक) शरीर 20-21 दिन तक ही अनशन सह सकता है। इसके बाद उनकी जान को खतरा हो सकता है। डॉक्टरों ने कहा था कि तीन-चार दिन में उनके अंग खराब हो सकते हैं। उन्हें ले जाए हुए चार दिन हो चुके हैं। हम नहीं चाहते कि वे अपना अनशन और लंबा खींचें।" कॉजपा प्रवक्ता सौरव दास ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में दावा किया कि प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में समर्थकों का जुटना जारी है। उन्होंने लिखा, "जंतर-मंतर और उसके आसपास भारी भीड़ जमा हो गई है... धर्मेंद्र प्रधान को जाना ही होगा! हम भी मौके पर मौजूद हैं और प्रदर्शनकारियों को कानूनी एवं चिकित्सीय सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। हमारी जीत जरूर होगी!" इससे पहले दिन में स्वयंसेवकों ने प्रदर्शन स्थल की सफाई की। पुलिस ने सोमवार की कार्रवाई के बाद वहां लगाए गए तंबू हटा दिए थे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा।
 

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