UPI भुगतान पर MDR से व्यापारियों पर बढ़ेगा बोझ, नकदी की तरफ लौटने की आशंका

Edited By Updated: 17 Sep, 2026 06:49 PM

mdr on upi payments will increase the burden on merchants

बड़े मूल्य के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (एमडीआर) लगाए जाने के बीच खुदरा एवं थोक व्यापारियों ने बृहस्पतिवार को कहा कि इससे कम मुनाफे पर काम करने वाले कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और कुछ व्यापारी नकद भुगतान को...

नेशनल डेस्क : बड़े मूल्य के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (एमडीआर) लगाए जाने के बीच खुदरा एवं थोक व्यापारियों ने बृहस्पतिवार को कहा कि इससे कम मुनाफे पर काम करने वाले कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और कुछ व्यापारी नकद भुगतान को प्राथमिकता देने के लिए मजबूर हो सकते हैं। व्यापारियों का यह भी कहना है कि यूपीआई से भुगतान की आदत पड़ जाने के कारण अब बहुत कम लोग नकदी लेकर निकलते हैं। ऐसे में यह बदलाव दुकानदारों तथा ग्राहकों दोनों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।

राष्ट्रीय राजधानी के थोक बाजार 'सदर बाजार बारी मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन' के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगने से छोटे व्यापारियों पर महीने में 3,000 से 5,000 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। उन्होंने कहा, ''यह सरकार की डिजिटल पहल को पीछे धकेलने वाला कदम है। एक तरफ सरकार कहती है कि आपको जेब में नकदी रखने की जरूरत नहीं है, वहीं ऐसा कदम उठाया गया है कि दुकानदार और ग्राहक सभी नकदी की ओर रुख करेंगे।''

हालांकि, खुदरा व्यापारियों के संगठन 'कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स' (कैट) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, ''इस शुल्क का छोटे दुकानदारों पर असर नहीं पड़ेगा। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने रुपे डेबिट कार्ड से भुगतान पर शुल्क नहीं लगने की बात कही है और बड़े व्यापारी यह तरीका अपना सकते हैं।'' भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद खंडेलवाल ने कहा कि डिजिटल भुगतान से जुड़ी साइबर सुरक्षा मजबूत करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं और एमडीआर से प्राप्त राशि का एक हिस्सा इस दिशा में इस्तेमाल किया जाएगा। एमडीआर वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी से यूपीआई भुगतान प्रणाली में शामिल भागीदारों को दिया जाता है।

एनपीसीआई के अनुसार, नई व्यवस्था का उद्देश्य यूपीआई भुगतान प्रणाली के लिए टिकाऊ राजस्व मॉडल तैयार करना है। वहीं दिल्ली व्यापार महासंघ के अध्यक्ष देवराज बवेजा ने कहा कि त्योहारों से ठीक पहले इस फैसले से व्यापारियों में रोष है। बाजार में मांग पहले ही कमजोर है और शुल्क से सबसे ज्यादा परेशानी थोक कारोबारियों को होगी। बवेजा ने कहा, ''पहले थोक व्यापारी आसानी से यूपीआई भुगतान करते थे, लेकिन अब बड़े भुगतान पर लगने वाले एमडीआर शुल्क से बचने के लिए उन्हें बैंक जाना पड़ सकता है।''

एनपीसीआई ने 15 सितंबर को घोषित नई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने का फैसला किया है। वहीं, 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये होगा। हालांकि, 2,000 रुपये तक के व्यापारी लेनदेन और दो व्यक्तियों के बीच होने वाले यूपीआई भुगतान पर शुल्क नहीं लगेगा। खेल सामान के लिए मशहूर मेरठ के सूरजकुंड स्पोर्ट्स मार्केट के एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर 'भाषा' से कहा कि खेल सामान महंगे होने के कारण उसकी करीब 80 प्रतिशत बिक्री में 2,000 रुपये से अधिक का भुगतान होता है। उन्होंने कहा कि ग्राहक के पास नकदी नहीं होने पर दुकानदार को यूपीआई भुगतान स्वीकार करना ही पड़ेगा, क्योंकि मना करने पर ग्राहक दूसरी दुकान का रुख कर सकता है। ऐसे में शुल्क का भार दुकानदार को ही उठाना पड़ेगा और ग्राहक से अलग से शुल्क मांगना भी आसान नहीं होगा।

एनपीसीआई के अनुसार प्रति माह एक लाख रुपये तक पाने वाले छोटे व्यापारियों के लिए सभी लेनदेन पर अनिवार्य रूप से शून्य एमडीआर की सुविधा मिलेगी। इस संदर्भ में मेरठ के एक कपड़ा दुकान के संचालक शिवम शर्मा ने कहा कि कपड़ों की खरीदारी में 2,000 रुपये से अधिक का भुगतान आम बात है और त्योहारों एवं शादी के मौसम में एक ग्राहक की खरीदारी कई हजार रुपये तक पहुंच जाती है। शर्मा ने कहा, ''ग्राहक अब बड़ी रकम का भुगतान भी यूपीआई से करना पसंद करते हैं। कपड़ों के कारोबार में मार्जिन भी बहुत अधिक नहीं होता है। ऐसे में इस शुल्क का असर हमारे मुनाफे पर पड़ सकता है।'' कारोबारियों को आशंका है कि इस शुल्क के आने से एक बार फिर नकद लेनदेन बढ़ सकता है।

दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-7 के ड्रायफ्रूट विक्रेता सागर खुराना ने कहा, "पहले 'डिजिटल इंडिया' के तहत यूपीआई को बढ़ावा दिया गया और अब शुल्क लगाया जा रहा है, जिससे कारोबारियों को नकदी की ओर लौटना पड़ सकता है।" कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यूपीआई पर कोई भी एमडीआर भारत में बिना किसी रुकावट के चल रही मोबाइल भुगतान व्यवस्था को खासा प्रभावित कर सकता है। चिल्ला गांव में किराने की दुकान चलाने वाले नितिन चौधरी ने कहा, ''यूपीआई से भुगतान की आदत पड़ जाने के कारण अब बहुत कम लोग नकदी लेकर निकलते हैं। ऐसे में यह शुल्क दुकानदारों तथा ग्राहकों दोनों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।''

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