Edited By Parveen Kumar,Updated: 07 Jul, 2026 10:32 PM

भारत, योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल 'प्रम्बानन मंदिर परिसर' के संरक्षण और जीर्णोद्धार में इंडोनेशिया की मदद करेगा। इस परियोजना पर काम करने के लिए मंगलवार को दोनों देशों ने 'आशय पत्र' का आदान-प्रदान किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 8...
नेशनल डेस्क : भारत, योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल 'प्रम्बानन मंदिर परिसर' के संरक्षण और जीर्णोद्धार में इंडोनेशिया की मदद करेगा। इस परियोजना पर काम करने के लिए मंगलवार को दोनों देशों ने 'आशय पत्र' का आदान-प्रदान किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 8 जुलाई को प्रम्बानन मंदिर परिसर की यात्रा करेंगे। वह राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर इंडोनेशिया में हैं। मोदी सोमवार को जकार्ता पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। यह उनके तीन देशों के दौरे का पहला चरण है – जिसमें ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भी शामिल हैं – ताकि 2018 की भारत-इंडोनेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत व्यापार, सुरक्षा और दुर्लभ मृदा खनिज जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत किया जा सके। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो ने मंगलवार को द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करने और शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र बनाने के तरीकों पर बातचीत की।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत के बाद, महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ मृदा खनिज, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, शिक्षा, चुनावी प्रक्रियाओं, दूरसंचार, कृषि, समुद्री सुरक्षा, अंतरिक्ष, स्टील आपूर्ति श्रृंखला, आपदा प्रबंधन, मेडिकल उत्पाद के नियमन और स्वास्थ्य कार्यबल में सहयोग जैसे क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ। मंत्रालय ने कहा, ''योग्याकार्ता में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल 'प्रम्बानन मंदिर परिसर' के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए भारत के समर्थन से जुड़े एक आशय पत्र का भी आदान-प्रदान किया गया।''
मोदी ने यहां संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा, ''कल मुझे योग्याकार्ता में राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ मिलकर प्रम्बानन मंदिर की संरक्षण परियोजना की शुरुआत करने का अवसर मिलेगा। एक हज़ार साल से भी अधिक पुराना प्रम्बानन मंदिर, भारत और इंडोनेशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत का एक शाश्वत प्रतीक है।'' यूनेस्को की वेबसाइट के अनुसार, 10वीं सदी में इंडोनेशिया में निर्मित एवं भगवान शिव को समर्पित सबसे बड़ा मंदिर परिसर है। इसके केंद्र में स्थित तीन प्रमुख मंदिरों की दीवारों पर रामायण महाकाव्य को उकेरा गया है। ये मंदिर हिंदू धर्म के तीन प्रमुख देवताओं - ब्रह्मा, विष्णु और महेश - को समर्पित हैं।
इसके अलावा तीन अन्य मंदिर उन पशुओं को समर्पित हैं, जिन्हें इन देवताओं का वाहन माना जाता है। बाद में, भारत और इंडोनेशिया की ओर से जारी संयुक्त वक्तव्य में कहा गया, ''दोनों नेताओं ने योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा भारत समर्थित परियोजना की शुरूआत का स्वागत किया।'' मोदी की यात्रा से पहले विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) रुद्रेंद्र टंडन ने 3 जुलाई को पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि "भारत और इंडोनेशिया वहां (प्रम्बानन मंदिर परिसर) के संरक्षण कार्य में सहयोग करेंगे।"
संयुक्त वक्तव्य के अनुसार, इंडोनेशिया ने भारत के राष्ट्रीय संग्रहालय द्वारा मूल नालंदा ताम्रपत्र की प्रतिकृति भेंट किए जाने की भी सराहना की। यह ताम्रपत्र लगभग 860 ईस्वी का है, जिस पर संस्कृत में अभिलेख अंकित हैं। यह प्रतिकृति अब मुआरा जांबी के नये संग्रहालय में प्रदर्शित की गई है। दोनों नेताओं ने अगस्त 2023 में वाराणसी में आयोजित जी20 संस्कृति मंत्रियों की बैठक में अंगीकार किये गए "काशी सांस्कृतिक मार्ग" में निहित सिद्धांतों का उल्लेख किया। उन्होंने सांस्कृतिक विरासत से जुड़े मामलों पर दोनों देशों की सरकारों के बीच लगातार परामर्श के महत्व को रेखांकित किया।
परामर्श में "दोनों देशों के संबंधित कानूनों और प्रक्रियाओं के अनुरूप तथा मित्रता और आपसी सम्मान की भावना के साथ" जारी रखने की बात कही गई है। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर और की. हजार देवंतरा (इंडोनेशिया के स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद और देश के पहले शिक्षा मंत्री) की स्थायी बौद्धिक विरासत और साझा शैक्षिक दृष्टिकोण की भी सराहना की। मोदी और सुबियांतो ने कहा कि इन दोनों महान व्यक्तित्वों के बीच हुए संवादों ने भारत और इंडोनेशिया के बीच साझा सांस्कृतिक एवं शैक्षिक संबंधों की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों देशों ने 2026–2027 को 'भारत–इंडोनेशिया सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति के लिए टैगोर–देवंतरा वर्ष' के रूप में मनाने पर सहमति जताई। मोदी 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया की यात्रा पर हैं।