Edited By Rahul Rana,Updated: 07 Aug, 2026 02:27 PM

केंद्र सरकार द्वारा परिसीमन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के संकेत मिलने के बाद तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है।
केंद्र सरकार द्वारा परिसीमन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के संकेत मिलने के बाद तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है। इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया पर चर्चा के लिए राज्य के सभी सांसदों की बैठक बुलाई है।
डीएमके ने स्पष्ट की स्थिति
हाल के दिनों में ऐसी चर्चाएं चल रही थीं कि DMK ने परिसीमन बिल को लेकर अपना रुख नरम कर लिया है। इससे विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेताओं के बीच सवाल उठने लगे थे। इन अटकलों के बीच DMK ने पहली बार खुलकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। पार्टी नेता उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि DMK ने शुरू से ही परिसीमन का विरोध किया है और आगे भी इसका विरोध जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि यह कोई नया मुद्दा नहीं है, लेकिन केंद्र सरकार इसे ऐसे पेश कर रही है जैसे पहली बार इस पर चर्चा हो रही हो।
विजय ने बुलाई सांसदों की बैठक
इस अहम मुद्दे पर अलग-अलग राय आने के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया पर चर्चा के लिए राज्य के सांसदों की बैठक बुलाई है। अब तक जब केंद्र सरकार बिल को फिर से शुरू करने की बात कर रही थी, तब DMK ने कोई कड़ा रुख नहीं अपनाया था। इससे विपक्ष, खासकर कांग्रेस में बेचैनी बढ़ गई थी। राहुल गांधी ने DMK पर निशाना साधते हुए बिल के समर्थकों को “21वीं सदी का एट्टाप्पन” कहा। तमिलनाडु में यह शब्द गद्दार के लिए इस्तेमाल होता है।
अप्रैल में क्या हुआ था?
अप्रैल में एकजुट विपक्ष ने संविधान के 131वें संशोधन विधेयक को पास होने नहीं दिया था। उस बिल में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने पर लगी रोक हटाने का प्रस्ताव था। तब DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन ने सांकेतिक विरोध के तौर पर बिल की कॉपी जलाई थी। उसके बाद काफी कुछ बदल चुका है। तमिलनाडु में कांग्रेस ने DMK का साथ छोड़कर विजय की पार्टी TVK का समर्थन किया। इसके बाद DMK राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन से अलग हो गई।
DMK की मुख्य मांग
DMK ने मांग की है कि अगले 25 वर्षों तक लोकसभा के परिसीमन का आधार 2011 की जनगणना के बजाय 1971 की जनगणना ही रहनी चाहिए। केंद्र सरकार लगातार इस मुद्दे पर आगे बढ़ रही है। तमिलनाडु में अब राजनीतिक समीकरण और पार्टियों के रुख दोनों ही ध्यान से देखे जा रहे हैं।