आखिर क्या है परिसीमन बिल? इससे क्या होगा बदलाव, जानिए सब कुछ

Edited By Updated: 05 Aug, 2026 02:40 PM

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परिसीमन बिल प्रस्ताव को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने- सामने है। आइए हम आप को आसान भाषा में समझाते हैं कि आखिर परिसीमन बिल क्या है ? इसे क्या फायदा होगा। दरअसल, परिसीमन बिल का मतलब ऐसे कानून/प्रस्ताव से है, जिसके जरिए चुनावी क्षेत्रों यानी लोकसभा और...

नेशनल डेस्क: परिसीमन बिल प्रस्ताव को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने- सामने है। आइए हम आप को आसान भाषा में समझाते हैं कि आखिर परिसीमन बिल क्या है ? इसे क्या फायदा होगा। दरअसल, परिसीमन बिल का मतलब ऐसे कानून/प्रस्ताव से है, जिसके जरिए चुनावी क्षेत्रों यानी लोकसभा और विधानसभा की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाता है। भारत में परिसीमन का काम परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) करता है, इसमें तय किया जाता है कि कौन-सा गांव, कस्बा या इलाका किस विधानसभा/लोकसभा सीट में आएगा। इसका उद्देश्य आमतौर पर आबादी के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों में समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना होता है। परिसीमन के दौरान SC/ST के लिए आरक्षित सीटों की संख्या और उनका क्षेत्र भी तय किया जाता है। 

2026 परिसीमन बिल 
दरअसल सरकार कहती है कि लोकसभा की सीटें हमेशा 543 पर नहीं रोकी जा सकती है। यह सीमा 1972 में तय हुई थी तबसे देश की आबादी दोगुनी हो चुकी है। ऐसे में परिसीमन के बिल के जरिए सीटों की सीमाओं को बदला जाए, संविधान संशोधन विधेयक के तहत सदस्यों की अधिकतम संख्या बढ़ाकर 850 कर देने का विचार कर रही है। हालांकि 2023 में 106 वें संवैधानिक संशोधन के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित की गईं। वर्तमान जनगणना के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च, 2027 है। यह देखते हुए कि अगले लोकसभा चुनाव 2029 में होंगे, यह संभावना नहीं है कि 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया 2029 के चुनावों से पहले पूरी हो जाएगी। इसका अर्थ यह होगा कि महिलाओं के लिए आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव पर लागू नहीं होगा। 

लोकसभा में सीटों की अधिकतम संख्या में वृद्धि
संविधान के अनुसार लोकसभा में अधिकतम 550 सदस्य होंगे, जिनमें राज्यों से 530 और केंद्र शासित प्रदेशों से 20 सदस्य शामिल होंगे। संविधान संशोधन विधेयक के तहत सदस्यों की अधिकतम संख्या बढ़ाकर 850 कर दी गई है, जिनमें राज्यों से 815 और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 सदस्य शामिल होंगे।

एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित 
106 वें संविधान (संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई थीं। यह आरक्षण 2023 के अधिनियम के लागू होने के बाद पहली जनगणना के आधार पर प्रभावी होगा। संविधान संशोधन विधेयक इस अनिवार्यता को समाप्त करता है।

परिसीमन आयोग की नियुक्ति
परिसीमन विधेयक, 2026 केंद्र सरकार को परिसीमन करने के लिए एक परिसीमन आयोग गठित करने का अधिकार देता है। इसमें निम्नलिखित सदस्य होंगे (i) एक अध्यक्ष जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश हों या रह चुके हों, (ii) मुख्य निर्वाचन आयुक्त या मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा मनोनीत निर्वाचन आयुक्त, और (iii) संबंधित राज्य के राज्य निर्वाचन आयुक्त। अध्यक्ष की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी।

विपक्ष क्यों कर रहा विरोध?
विपक्ष को दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संघीय संतुलन को लेकर डर है कि उसे इस क्षेत्र में नुकसान हो सकता है। 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों का राज्यों के बीच बंटवारा लंबे समय से फ्रीज है। 84वें संविधान संशोधन ने यह रोक पहली जनगणना जो 2026 के बाद होगी, उसके आंकड़े आने तक बढ़ाई थी।

दक्षिणी राज्यों खासकर तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने जनसंख्या नियंत्रण में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है। विपक्ष का तर्क है कि अगर नई सीटों का बंटवारा मुख्य रूप से आबादी के आधार पर हुआ, तो ज्यादा आबादी वाले उत्तर भारतीय राज्यों को तुलनात्मक रूप से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं और दक्षिण का लोकसभा में प्रतिशत हिस्सा घट सकता है। इसी वजह से यह मुद्दा खासकर तमिलनाडु और दक्षिण बनाम उत्तर की बहस बन गया है। हाल में राहुल गांधी ने भी परिसीमन के प्रस्ताव को लेकर विपक्षी दलों से विरोध की अपील की है।
 

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