Edited By Rohini Oberoi,Updated: 16 Jul, 2026 02:58 PM

भारत की प्रतिष्ठित अंतरिक्ष एजेंसी ISRO इस वक्त वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बड़े पैमाने पर संस्थान छोड़ने (ब्रेन ड्रेन) के संकट से जूझ रही है। सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों के भीतर इसरो के करीब 100 से 120 वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने...
ISRO Scientists Resignation Crisis : भारत की प्रतिष्ठित अंतरिक्ष एजेंसी ISRO इस वक्त वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बड़े पैमाने पर संस्थान छोड़ने (ब्रेन ड्रेन) के संकट से जूझ रही है। सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों के भीतर इसरो के करीब 100 से 120 वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इनमें से कई वैज्ञानिक देश के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'गगनयान' और 'चंद्रयान' जैसे बड़े मिशनों की रीढ़ थे।
वैज्ञानिकों के इस तरह अचानक संस्थान छोड़ने से केंद्र सरकार और अंतरिक्ष विभाग में खलबली मच गई है। स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने 14 जुलाई 2026 को एक बेहद सख्त आधिकारिक आदेश जारी किया है जिसके तहत वैज्ञानिकों के इस्तीफे और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के नियमों को पहले से कहीं ज्यादा कड़ा कर दिया गया है।
इसरो में वर्तमान में कुल मिलाकर लगभग 14,600 कर्मचारी काम करते हैं। आंतरिक सूत्रों के अनुसार इस्तीफे की सबसे बड़ी लहर इसरो के दो बड़े सेंटर्स में देखी गई है। बेंगलुरु स्थित इस केंद्र से सबसे अधिक झटका लगा है जहां अकेले करीब 80 वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों ने एक साथ संस्थान को अलविदा कह दिया।
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तिरुवनंतपुरम स्थित इस रणनीतिक केंद्र से भी करीब 20 वरिष्ठ वैज्ञानिकों के इस्तीफे सामने आए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि कई अन्य वैज्ञानिकों के इस्तीफे अभी प्रक्रिया (Evaluation Stage) में हैं। चिंता की बात यह है कि इस्तीफा देने वालों में जूनियर स्टाफ नहीं बल्कि इसरो की सबसे गोपनीय और रणनीतिक परियोजनाओं को लीड करने वाले बड़े चेहरे शामिल हैं:
मिशन डायरेक्टर्स ने छोड़ा साथ: VSSC से जुड़े और भारी-भरकम एलवीएम-3 (LVM-3) रॉकेट कार्यक्रम के प्रोजेक्ट डायरेक्टर विक्टर जोसेफ ने इस्तीफा दे दिया है। इनके अलावा यूआरएससी से 'स्पेडेक्स' (SPADEX) मिशन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और देश के गौरव चंद्रयान-3 मिशन के प्रोजेक्ट मैनेजर व युवा वैज्ञानिक आदित्य रावपल्ली ने भी इसरो से नाता तोड़ लिया है।
इस्तीफों की इस रफ्तार पर ब्रेक लगाने के लिए अंतरिक्ष विभाग ने साल 2020 के पुराने सर्विस नियमों को तुरंत प्रभाव से बदल दिया है। पुरानी व्यवस्था के तहत इसरो के अलग-अलग केंद्रों के 'सेंटर डायरेक्टर्स' के पास ग्रुप 'A' के वैज्ञानिकों के इस्तीफे या वीआरएस (VRS) को खुद मंजूर करने का अधिकार था।
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नए नियमों के मुताबिक अब सेंटर डायरेक्टर किसी भी वैज्ञानिक का इस्तीफा सीधे स्वीकार नहीं कर पाएंगे। विशेष रूप से गगनयान या किसी अन्य बड़े मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों के मामलों को पूरी सिफारिश और वजहों के साथ अंतिम फैसले के लिए नई दिल्ली स्थित अंतरिक्ष विभाग (DoS) के पास भेजना अनिवार्य कर दिया गया है।
इसरो प्रमुख का बयान और विशेषज्ञों की राय
इसरो के शीर्ष नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम को स्वीकार किया है। उन्होंने इन इस्तीफों की आधिकारिक पुष्टि करते हुए कहा कि संगठन किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और मिशन के काम प्रभावित नहीं होंगे।
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अंतरिक्ष क्षेत्र के कुछ पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि केवल प्रशासनिक आदेश जारी करके इस्तीफों को रोकना सही समाधान नहीं है। भारत में अब Private Space Sector बहुत तेजी से बढ़ रहा है जहां इन वैज्ञानिकों को बेहतर सैलरी पैकेज, सुविधाएं और नए अवसर मिल रहे हैं। सरकार को वैज्ञानिकों की इन जमीनी समस्याओं और असंतोष की असली वजहों को दूर करना होगा।