सच सामने आने से पहले फाइनल सेटलमेंट साइन क्यों करा रही Air India, पूर्व CM की बेटी का टाटा ग्रुप से तीखा सवाल

Edited By Updated: 10 Jun, 2026 03:41 PM

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12 जून, 2025 को हुए एयर इंडिया के विमान 'AI 171' हादसे के एक साल बाद, अब पीड़ितों के परिजनों को दिए जाने वाले मुआवज़े की प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपानी की बेटी राधिका मिश्रा ने Air India द्वारा अपनाई जा रही...

नई दिल्ली: 12 जून, 2025 को हुए एयर इंडिया के विमान 'AI 171' हादसे के एक साल बाद, अब पीड़ितों के परिजनों को दिए जाने वाले मुआवज़े की प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपानी की बेटी राधिका मिश्रा ने Air India द्वारा अपनाई जा रही 'फुल एंड फाइनल सेटलमेंट'  नीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। गौरतलब है कि इस विमान दुर्घटना में मारे गए 260 लोगों में विजय रूपानी भी शामिल थे।

सच सामने आने से पहले दावे छोड़ने का दबाव क्यों? - राधिका मिश्रा
लंदन में रहने वालीं चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) राधिका मिश्रा ने टाटा ग्रुप और एयर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को एक ईमेल भेजकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। उन्होंने सवाल उठाया है कि आधिकारिक जांच पूरी होने और हादसे के Actual facts सामने आने से पहले ही एयर इंडिया पीड़ित परिवारों से 'फुल एंड फाइनल सेटलमेंट' के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर क्यों करा रही है?

राधिका मिश्रा ने ईमेल में लिखा, "इस दस्तावेज़ के अनुसार, परिवारों से यह उम्मीद की जा रही है कि वे सभी Actual facts सामने आने से पहले ही अपने वर्तमान और भविष्य के कानूनी दावों को हमेशा के लिए छोड़ दें। हम सिर्फ मुआवज़े के नहीं, बल्कि जवाबों और इस त्रासदी के एक निर्णायक अंत यानि closure के हकदार हैं।" उन्होंने 'रसीद, डिस्चार्ज और इंडेम्निटी' (RDI) दस्तावेज़ की शर्तों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसमें न केवल एयर इंडिया, बल्कि विमान निर्माता कंपनी बोइंग, जनरल इलेक्ट्रिक (GE), सफ्रान, हनीवेल, भारत सरकार और अहमदाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसी तीसरी पार्टियों को भी भविष्य की सभी कानूनी देनदारियों से बरी करने की बात कही गई है।

एयर इंडिया की सफाई : "किसी भी परिवार पर कोई दबाव नहीं"
इन आरोपों का जवाब देते हुए एयर इंडिया ने स्पष्ट किया है कि किसी भी पीड़ित परिवार पर इस सेटलमेंट को तुरंत स्वीकार करने का कोई दबाव या समय-सीमा तय नहीं की गई है। एयर इंडिया के अनुसार, पीड़ित परिवार 'एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो' (AAIB) की अंतिम रिपोर्ट आने तक इंतजार करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। यह प्रक्रिया उन परिवारों के लिए शुरू की गई है जो अनिश्चित काल तक इंतजार नहीं करना चाहते। RDI दस्तावेज़ में इस्तेमाल की गई कानूनी भाषा अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र के मानकों के अनुरूप ही है। पूर्व में जब एयर इंडिया सरकारी स्वामित्व में थी, तब भी ऐसे हादसों के समय इसी प्रकार के व्यापक समझौतों का उपयोग किया जाता था। एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी तीसरी पार्टी (जैसे विमान या इंजन निर्माता) को बचाना नहीं है। बल्कि यह इसलिए किया गया है ताकि भविष्य में वे तीसरी पार्टियां मुआवज़े के दावों को वापस एयर इंडिया की ओर न मोड़ सकें और यह सेटलमेंट पूरी तरह अंतिम माना जाए।

पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपानी इसी विमान में थे मौजूद
 यह भीषण विमान हादसा पिछले साल तब हुआ था जब अहमदाबाद से उड़ान भरते ही एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर (AI 171) दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में विमान में सवार 241 लोगों के साथ-साथ ज़मीन पर मौजूद बीजे मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट हॉस्टल के 19 अन्य लोगों की भी जान चली गई थी। पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपानी इसी विमान से अपनी बेटी से मिलने जा रहे थे।

वहीं, एयर इंडिया ने बताया कि आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए दुर्घटना के तुरंत बाद अंतरिम मुआवज़ा जारी कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त, टाटा ग्रुप द्वारा गठित 'AI-171 मेमोरियल एंड वेलफेयर ट्रस्ट' की ओर से पीड़ित परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि (ex-gratia) भी प्रदान की गई है।

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