इजरायल ने हिजबुल्लाह पर दिखाई सख्ती; भारत का दिया उदाहरण, कहा- "India जानता है आतंकवाद का दर्द'

Edited By Updated: 01 Jul, 2026 07:25 PM

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इजरायल की उप विदेश मंत्री शैरन हास्केल ने कहा कि लेबनान में स्थायी शांति तभी संभव है जब हिजबुल्लाह जैसे सशस्त्र समूहों का निरस्त्रीकरण हो। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद की चुनौती को समझता है। साथ ही ईरान को लेकर भी चिंता जताई। ये इजरायल सरकार के...

International Desk: इजरायल की उप विदेश मंत्री शैरन हास्केल ने कहा है कि लेबनान में स्थायी शांति और स्थिरता तभी संभव है, जब हिजबुल्लाह जैसे सशस्त्र समूहों का प्रभाव समाप्त हो और उनका निरस्त्रीकरण किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत भी सीमा पार आतंकवाद का सामना कर चुका है, इसलिए वह इस वास्तविकता को अच्छी तरह समझता है।   बातचीत में शैरन हास्केल ने कहा,  "हम हमेशा शांति और स्थिरता की उम्मीद करते हैं। लेकिन स्थायी शांति का एकमात्र रास्ता आतंकवादी समूहों को समाप्त करना है। भारत के लोग भी इसे अच्छी तरह समझते हैं।"  यह टिप्पणी उन्होंने अमेरिका की मध्यस्थता में घोषित इजरायल-लेबनान त्रिपक्षीय ढांचे (Trilateral Framework) के संदर्भ में की।

 

जब उनसे पूछा गया कि क्या इस समझौते के बावजूद इजरायल लेबनान में सैन्य अभियान जारी रखेगा, तो उन्होंने कहा कि यह ढांचा सहयोग का माध्यम है, लेकिन यदि लेबनानी सेना हिजबुल्लाह के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम नहीं होती, तो इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठाएगा।  उनके अनुसार, यह समझौता सहयोग की रूपरेखा देता है।  लेकिन यदि सुरक्षा खतरे बने रहते हैं, तो इजरायल कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखेगा। शैरन हास्केल ने स्वीकार किया कि सहयोगी देशों के बीच नीतिगत मतभेद होना असामान्य नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के हितों की रक्षा कर रहे हैं, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, उनके अनुसार दोनों देशों का व्यापक उद्देश्य समान है।  ईरान और अमेरिका के बीच जारी तकनीकी वार्ता पर टिप्पणी करते हुए हास्केल ने कहा कि उन्हें इस प्रक्रिया से अधिक उम्मीद नहीं है। उन्होंने ईरान को "हिंसक और आक्रामक शासन" बताते हुए कहा कि भारत को भी इस स्थिति पर सतर्क रहना चाहिए।

 

इजरायली उप विदेश मंत्री ने कहा कि इजरायल की सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य लेबनान की सरकार या उसकी सेना नहीं, बल्कि हिजबुल्लाह के मुख्यालय, रॉकेट लॉन्चर और हथियार भंडार हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी के लिए अच्छा नहीं होता, लेकिन इजरायल अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा।अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, हाल ही में घोषित त्रिपक्षीय ढांचे के तहत लेबनान अपनी पूरी भूमि पर सरकारी नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास करेगा। लेबनानी सशस्त्र बल देश की सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी संभालेंगे।  हिजबुल्लाह सहित सभी गैर-राज्य सशस्त्र समूहों के सत्यापित निरस्त्रीकरण का लक्ष्य रखा गया है। इसके बदले सुरक्षा परिस्थितियां अनुकूल होने पर इजरायल चरणबद्ध तरीके से अपनी सेनाओं की वापसी करेगा।  

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