दिल्ली: पैसों की कमी नहीं, काम दिखना चाहिए – समीक्षा बैठक में अधिकारियों पर सख्त हुईं सीएम रेखा गुप्ता

Edited By Updated: 06 Mar, 2026 08:56 PM

rekha gupta development meeting

दिल्ली सरकार ने राजधानी में चल रहे विकास कार्यों को तेज करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को दिल्ली सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ शहर में चल रही परियोजनाओं की प्रगति की...

नेशनल डेस्क: दिल्ली सरकार ने राजधानी में चल रहे विकास कार्यों को तेज करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को दिल्ली सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ शहर में चल रही परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि राजधानी के इंफ्रास्ट्रक्चर और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कामों में न तो बजट की कमी आने दी जाएगी और न ही किसी तरह की लापरवाही स्वीकार की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी लंबित प्रक्रियाओं को जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने खास तौर पर कहा कि मार्च 2026 के अंत तक प्रोजेक्ट्स से जुड़े टेंडर, स्वीकृतियां और अन्य जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएं, ताकि मॉनसून से पहले ही काम शुरू होकर जमीन पर दिखाई देने लगे।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री विकास फंड, दिल्ली ग्राम विकास बोर्ड और ट्रांस-यमुना क्षेत्र विकास बोर्ड के तहत चल रहे प्रोजेक्ट्स की विस्तृत समीक्षा की गई। इस बैठक में दिल्ली ग्राम विकास बोर्ड के चेयरमैन राजकुमार चौहान, ट्रांस-यमुना क्षेत्र विकास बोर्ड के चेयरमैन अरविंदर सिंह लवली समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि लोगों को इसका वास्तविक लाभ दिखाई देना चाहिए।

मुख्यमंत्री विकास फंड के अंतर्गत बड़ी संख्या में परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस योजना के तहत 3,800 से अधिक प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है, जिनकी कुल अनुमानित लागत लगभग 1,798 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं में सड़कों का निर्माण और मरम्मत, नालियों का विकास, पेयजल व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, पार्कों का सौंदर्यीकरण और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्य शामिल हैं। इन परियोजनाओं को लागू करने में एमसीडी, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, दिल्ली जल बोर्ड, लोक निर्माण विभाग, डीएसआईआईडीसी और बिजली वितरण कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

दिल्ली के ग्रामीण इलाकों के विकास के लिए दिल्ली ग्राम विकास बोर्ड के माध्यम से भी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इस बोर्ड के तहत 700 से अधिक परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिन पर करीब 1,557 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन योजनाओं का उद्देश्य गांवों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना और वहां रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। इनमें से अधिकतर प्रोजेक्ट्स सिंचाई विभाग और नगर निगम के माध्यम से लागू किए जा रहे हैं।

इसके अलावा यमुनापार क्षेत्र के विकास पर भी सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। ट्रांस-यमुना क्षेत्र विकास बोर्ड के अंतर्गत लगभग 800 कार्यों को मंजूरी दी गई है, जिनकी कुल लागत करीब 430 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इन परियोजनाओं में सड़क और नाली निर्माण, पेयजल व्यवस्था, पार्कों का विकास, स्ट्रीट लाइट, सामुदायिक भवन, स्कूल भवन और फुटब्रिज जैसे कार्य शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य यमुनापार के विभिन्न इलाकों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि लंबित प्रोजेक्ट्स से जुड़े दस्तावेज और टेंडर प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए और विकास कार्यों को तेजी से जमीन पर उतारा जाए। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि तय समय सीमा के भीतर काम पूरा होना चाहिए और किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

सरकार के अनुसार इन तीनों योजनाओं के अंतर्गत कुल मिलाकर लगभग 3,786 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में बुनियादी सुविधाओं में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास को प्राथमिकता देना है और इसके लिए प्रशासनिक जवाबदेही और तेज कार्रवाई दोनों जरूरी हैं।
 

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