Husband Swapping: सगी बहनों ने की अनोखी डील, मौजूदा पतियों के साथ थी नाखुश, जताई अदला-बदली की इच्छा

Edited By Updated: 01 May, 2026 10:58 AM

the case of spousal swapping is entangled in the mp high court

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने जजों से लेकर वकीलों तक को हैरान कर दिया। जिसे पुलिस और कोर्ट अपहरण का मामला समझ रहे थे वह सुनवाई के दौरान पतियों की अदला-बदली (Husband Swapping) की एक अजीबोगरीब...

Strange Family Dispute : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने जजों से लेकर वकीलों तक को हैरान कर दिया। जिसे पुलिस और कोर्ट अपहरण का मामला समझ रहे थे वह सुनवाई के दौरान पतियों की अदला-बदली (Husband Swapping) की एक अजीबोगरीब पारिवारिक दास्तां निकली।

जानें पूरा मामला?

दतिया के रहने वाले गिरिजा शंकर नाम के व्यक्ति ने हाई कोर्ट में एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus) दायर की थी। उसने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी और बेटी का मायाराम नाम के व्यक्ति ने अपहरण कर लिया है और उन्हें बंधक बनाकर रखा हुआ है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को महिला को तुरंत ढूंढकर पेश करने का आदेश दिया।

हुआ चौंकाने वाला खुलासा

जब पुलिस ने महिला को कोर्ट में पेश किया तो कहानी पूरी तरह पलट गई। महिला ने जज के सामने साफ कहा कि उसका कोई अपहरण नहीं हुआ है। उसने बताया वह अपनी मर्जी से मायाराम के साथ रह रही है। रिश्ते में मायाराम उसका बहनोई (जीजा) लगता है। मामले ने तब और दिलचस्प मोड़ ले लिया जब यह पता चला कि यह केवल एक तरफा कहानी नहीं है।

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दो सगी बहनों ने कोर्ट के सामने इच्छा जताई कि वे अपने मौजूदा पतियों के साथ खुश नहीं हैं और एक-दूसरे के पति के साथ रहना चाहती हैं। बड़ी बहन ने कहा कि वह अपने बहनोई (छोटी बहन के पति) के साथ रहना चाहती है। छोटी बहन ने अपने जीजा (बड़ी बहन के पति) के साथ जीवन बिताने की बात कही। दोनों बहनों ने स्पष्ट कर दिया कि वे अपनी मर्जी से यह कदम उठा रही हैं और इसमें किसी भी प्रकार का दबाव या जबरदस्ती नहीं है।

कोर्ट का फैसला

दोनों पक्षों की दलीलें और महिलाओं के बयान सुनने के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि यह अपहरण या बंधक बनाने का मामला बिल्कुल नहीं है। चूंकि दोनों महिलाएं वयस्क हैं और अपनी मर्जी से फैसले ले रही हैं इसलिए कोर्ट ने कहा कि इसमें किसी के कानूनी अधिकारों का हनन नहीं हो रहा है। फिलहाल अदालत ने गिरिजा शंकर की याचिका को खारिज करते हुए मामले को समाप्त कर दिया।

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