Edited By Ramkesh,Updated: 19 Apr, 2026 04:55 PM
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकसभा में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026' के पारित नहीं हो पाने पर विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कि ये इंडी गठबंधन ने द्रौपदी चीरहरण की याद दिला दी है। मुस्लिम महिलओं के लिए अगल आरक्षण की...
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकसभा में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026' के पारित नहीं हो पाने पर विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कि ये इंडी गठबंधन ने द्रौपदी चीरहरण की याद दिला दी है। मुस्लिम महिलओं के लिए अगल आरक्षण की मांग करना संविधान का अपमान है। सीएम ने कहा कि हम सब इस बात को जानते हैं कि प्रधानमंत्री जी ने 2014 में देश की सत्ता जब अपने हाथों में ली थी,तब उन्होंने एक बात स्पष्ट कही थी कि, इस देश मे सिर्फ 4 ही जातियां हैं,नारी,गरीब,युवा,किसान है।
भारत को कमजोर करने की नीयत से जिन लोगों ने जातिवाद के नाम पर जिन लोगों ने अपने परिवार का भरण पोषण कर उन लोगों ने देश को लूटा है,स्वाभाविक रूप से यह उनके लिए यह एक चुनौती थी,और चेतावनी भी थी। इसीलिए उन्होंने हमेशा ऐसे प्रोग्रेसिव कदम का जो प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में जब भी उठा है,कांग्रेस व उसके जितने भी पार्टनर हैं,उन्होंने हमेशा उस प्रोग्रेसिव सोच को,और देशहित के लिए उठाए जा रहे कदम का विरोध करते रहे।
उन्होंने कहा कि आधी आबादी के मन में विपक्ष के इस नारी विरोधी आचरण के बारे में भारी आक्रोश है। वह आक्रोश कांग्रेस और इंडी गठबंधन के सहयोगी दल समाजवादी पार्टी,आरजेडी, टीएमसी,डीएमके,अन्य उन दलों का जो इस पाप में भागीदार थे,उनके प्रति आधी आबादी के मन मे आक्रोश देखने को मिल रहा है कि,कैसे प्रधानमंत्री जी द्वारा उठाये जाने वाले देशहित,समाजहित के कदमो को बैरियर के रूप में इंडी गठबंधन किस हद तक जाकर षड्यंत्र करता है।
उन्होंने कहा कि 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ था। जब महिला व सामाजिक संगठनो ने इसकी मांग की कि, यह अधिनियम 2034 की बजाय 2029 में लागू हो,तो उनकी मांग के अनुरूप प्रधानमंत्री जी ने सभी पक्षों से विचार विमर्श करने के उपरांत, केंद्रीय सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में आवश्यक संशोधन लेकर आई। इसके लिए संसद का विशेष अधिवेशन भी हुआ। कुछ राज्यों ने यह मांग भी उठाई थी कि,ऐसा न हो इसके माध्यम से उनके हक को कम कर दिया जाय।
प्रधानमंत्री जी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम विधेयक 2023 में पारित करते समय तय किया था कि किसी का हक नहीं छीना जाएगा, इसके लिए 33 फीसदी आरक्षण के लिए अतिरिक्त सीट लोकसभा व विधानसभा में बढ़ाये जाएंगे।
जब इधर यह बात चर्चा में आई कि दक्षिण भारत के राज्य मांग उठा रहे हैं कि, हमारा हक कम होगा, तो प्रधानमंत्री जी ने इस बात के लिए और मा.गृह मंत्री जी ने भी इस बात के लिए आश्वस्त किया कि 2011 की जनगणना के अनुसार जो व्यवस्था है, उसी के तहत जैसे अन्य राज्यों में, उत्तर के राज्यों में, पूरब के राज्यों में बढ़ेंगे, वैसे ही दक्षिण के राज्यों में भी वह अनुपात उसी अनुपात में यह बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि हक किसी का कम नहीं होना है, केवल एक ही इच्छा है कि सारा सदन मिलकर के भारत की नारी को सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के प्रतीक नारी शक्ति वंदन अधिनियम को इस संशोधन के साथ पारित करके 2029 में उनका अधिकार दे दे, लेकिन जो दृश्य वास्तव में सदन के अंदर इंडी गठबंधन का रहा है यह पूरी तरीके से एक बार उस दृश्य की ओर ध्यान आकर्षित करता है जो भरी सभा में द्रौपदी का चीरहरण जैसा दृश्य था। किस प्रकार की टिप्पणी और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां विपक्ष के द्वारा की गईं और किस प्रकार का आचरण किया गया, यह किसी से छुपा हुआ नहीं है।
उन्होंने कहा कि इन सब आश्वासनों के बाद सर्वसम्मति से यह कार्य होता,तो स्वाभाविक रूप से पूरे सदन को इसका श्रेय मिलता। नारी को उसका हक मिलता,लेकिन इसमें ऐसी बातें की गई कि,जैसे समाजवादी पार्टी ने मुद्दा छेड़ा की मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण क्यों नहीं मिल पा रहा है? ये लोग संविधान की दुहाई देते हैं,लेकिन बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के भावनाओ के प्रतिकूल आचरण इनका यहां पर भी देखने को नहीं मिला। उन्होंने कहा कि जब भारत का संविधान निर्माण हो रहा था,तब संविधान निर्माण के समय भी धर्म के आधार पर आरक्षण देने की मांग उठी थी। तब सर्वसम्मति से इसका तब सभी पक्षों ने विरोध किया था। बाबा साहब ने इसपर तीखी टिप्पणी लिखी थी- "एकबार विभाजन हो गया है, भारत दूसरे विभाजन के लिए तैयार नहीं हो सकता। लौहपुरुष सरदार पटेल जी ने इसका विरोध किया,संविधान निर्माण समिति के सभी सदस्यों ने इसका पुरजोर विरोध किया। लेकिन समाजवादी पार्टी और उनके अन्य सहयोगी, कांग्रेस की उस रणनीति में साझीदार रहे।
आज जब आप मुस्लिम महिलाओं की बात करते हैं, वे तब कहां थे जब शाहबानो प्रकरण में कांग्रेस की सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकार को पूरी तरह उन्हें वंचित करने का प्रयास किया? याद करिए यह इंडी गठबंधन है, जब प्रधानमंत्री मोदी जी ने शाहबानो प्रकरण में कांग्रेस के इस पाप का परिमार्जन करने का कार्य किया था और उस समय प्रधानमंत्री जी ने देश के अंदर ट्रिपल तलाक पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया।
भारत का कानून शादी-ब्याह के लिए भारत के प्रत्येक नागरिक पर समान रूप से लागू होगा। तब ट्रिपल तलाक के खिलाफ बनाए गए कानून का भी कांग्रेस और इंडी गठबंधन के जितने भी अन्य सहयोगी हैं, समाजवादी पार्टी, टीएमसी, डीएमके इन सबने तब भी विरोध किया था। यह इनके दोहरे आचरण को प्रदर्शित करता है।
ऐसा नहीं कि इन लोगों को देश के अंदर सत्ता में रहने का अधिकार न प्राप्त हुआ हो। आज जो लोग महिलाओं के हक की बात की दुहाई देते हैं, उनसे पूछा जाना चाहिए कांग्रेस और इंडी गठबंधन को देश के अंदर सबसे अधिक समय तक शासन करने का अवसर प्राप्त हुआ। सबसे अधिक समय तक, लेकिन जिन चार जातियों का उल्लेख प्रधानमंत्री मोदी जी ने किया, नारी के लिए भारत की आधी आबादी, गरीब के लिए, अन्नदाता किसान के लिए और युवा के लिए कोई भी अच्छी सोच, अच्छे प्रोग्राम, प्रोग्रेसिव सोच को कभी भी इंडी गठबंधन कभी भी आगे नहीं बढ़ा पाया।
सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने जब देश की सत्ता संभाली थी, इसके बाद उन्होंने प्रत्येक तबके के लिए जो कार्य आगे बढ़ाए, बिना भेदभाव के, स्लोगन व्यक्ति, जाति, मत और मजहब नहीं था, क्षेत्र और भाषा नहीं थी, मुद्दा था सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास और सबका विश्वास। यह सबको लेकर के एक साथ चलने की बात थी।
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया, इस भाव के साथ उन्होंने अपने कदम को आगे बढ़ाया। नारी शक्ति के लिए किए जाने वाले प्रयास में याद करिए "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" का पहला प्रस्ताव पारित करते हैं। बेटी की रक्षा होगी, भ्रूण हत्या नहीं होगी, लिंगानुपात अगर कहीं विषम है, उसको सही करेंगे,देश के अंदर उन्होंने इसको लागू किया।
मातृ वंदना योजना, मातृत्व रक्षा के साथ जोड़ने का कार्य किया,बेटी गर्भ में भी सुरक्षित रहेगी और उसका बाहर आने पर उसका टीकाकरण हो, इसके लिए भी उन्होंने इंद्रधनुष जैसे प्रोग्राम चलाए। परिणाम क्या रहा? मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में बेहतरीन रिजल्ट सामने आए। यह कदम प्रधानमंत्री जी के द्वारा उठाए गए उन कदमों का हिस्सा है।