पेट्रोल-डीजल की महंगाई से बिगड़ेगा रसोई का बजट, जानिए कैसे आपके रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ेगा असर

Edited By Updated: 18 May, 2026 05:58 AM

the kitchen budget will be affected due to rising prices of petrol and diesel

आम आदमी की जेब पर एक बार फिर महंगाई की मार पड़ी है। लंबे समय के बाद देशभर में पेट्रोल और डीजल के दामों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है।

नेशनल डेस्कः आम आदमी की जेब पर एक बार फिर महंगाई की मार पड़ी है। लंबे समय के बाद देशभर में पेट्रोल और डीजल के दामों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। इसके साथ ही दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में CNG के दाम भी 2 रुपये प्रति किलो बढ़ गए हैं। तेल की इन बढ़ती कीमतों का सीधा असर अब आपकी रसोई के बजट और रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ना तय माना जा रहा है।

3 महीने में 50% महंगा हुआ कच्चा तेल
सरकार और तेल कंपनियों का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई भारी उछाल के कारण यह फैसला लेना पड़ा है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के कारण होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधित हुई है। पिछले तीन महीनों में ही कच्चा तेल 75 डॉलर प्रति बैरल से छलांग लगाकर 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है।

आम आदमी की जेब पर चौतरफा मार
जानकारों का मानना है कि इस बढ़ोतरी का असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा।

  • महंगा होगा ट्रांसपोर्ट: ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा, जिससे सब्जी, दूध, अनाज और अन्य खाद्य सामग्री के दाम बढ़ सकते हैं।
  • रोजमर्रा का सामान: FMCG, स्टील और ई-कॉमर्स सेक्टर पर भी इसका दबाव दिखेगा, जिससे ऑनलाइन डिलीवरी और घर का जरूरी सामान महंगा हो सकता है।
  • सफर होगा महंगा: ऑफिस जाने वालों के लिए गाड़ी का खर्च तो बढ़ेगा ही, साथ ही बस और ऑटो के किराए में भी बढ़ोत्तरी की आशंका है।

अभी और बढ़ सकते हैं दाम!
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के अनुसार, तेल कंपनियां लंबे समय से नुकसान झेल रही थीं और केवल 3 रुपये की बढ़ोत्तरी से उनका पूरा घाटा कम नहीं होगा। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और भी इजाफा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

अर्थशास्त्रियों की राय
एमके ग्लोबल की इकोनॉमिस्ट माधवी अरोड़ा का कहना है कि पेट्रोल-डीजल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में 5 फीसदी हिस्सेदारी रखते हैं, इसलिए यह बढ़ोत्तरी सीधे तौर पर खुदरा महंगाई को ऊपर ले जाएगी। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि कंपनियां पूरी बढ़ोत्तरी का बोझ ग्राहकों पर नहीं डालती हैं, तो महंगाई 4.5 से 5 फीसदी के दायरे में बनी रह सकती है।

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