Edited By Niyati Bhandari,Updated: 04 Aug, 2026 01:14 AM

Sawan Kalashtami 2026: जानें, सावन 2026 में कालाष्टमी की सही तिथि, पूजा विधि और राहु दोष निवारण के प्रभावशाली मंत्र। 4 या 5 अगस्त कब रखा जाएगा कालाष्टमी व्रत।
Sawan Kalashtami 2026: हिंदू धर्म में सावन मास का विशेष महत्व है और इस पवित्र महीने में आने वाली कालाष्टमी का महत्व और भी बढ़ जाता है। भगवान शिव के रौद्र और रक्षक स्वरूप काल भैरव को समर्पित यह दिन तंत्र साधना और भय-मुक्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन के बड़े से बड़े संकट और शत्रु बाधाएं दूर हो जाती हैं।

भ्रम न पालें, नोट करें सही तिथि और शुभ मुहूर्त
इस वर्ष सावन कालाष्टमी की तिथि को लेकर लोगों में संशय है। वैदिक पंचांग बताता है कि सावन कृष्ण अष्टमी तिथि 5 अगस्त 2026 को रात 8 बजकर 42 मिनट पर शुरू होगी। इस तिथि का समापन 06 अगस्त को शाम 6 बजकर 52 मिनट पर होगा। उदयातिथि और मान्यताओं के अनुसार, सावन की कालाष्टमी 5 अगस्त को ही मनाई जाएगी।
Kaal Bhairav Jayanti vrat and upvaas काल भैरव जयंती व्रत और उपवास
यदि संभव हो, तो इस दिन उपवास रखें और केवल फलाहार या जल ही ग्रहण करें। इससे मानसिक शांति और भगवान भैरव की कृपा प्राप्त होती है।
राहु दोष और मानसिक तनाव से मिलेगी राहत
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कालाष्टमी का व्रत न केवल पापों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि यह राहु दोष के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में भी रामबाण माना गया है। जो भक्त इस दिन श्रद्धापूर्वक उपासना करते हैं, उनके जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है और आर्थिक तंगियों से छुटकारा मिलता है।
Kaal Bhairav Puja Materials काल भैरव पूजा सामग्री: काली तिल, उबटन सामग्री, पुष्प, दूध, शहद, घी, पानी, और लाल रंग का कपड़ा। भैरव जी की प्रतिमा या चित्र रखें।

Kaal Bhairav Jayanti Puja Vidhi काल भैरव जयंती पूजा विधि:
सबसे पहले भगवान भैरव का आवाहन करें और उनका स्मरण करें।
उनके सामने दीपक जलाएं, अगर संभव हो तो दीपक में तिल का तेल या घी डालें।
भैरव जी के चित्र या मूर्ति पर दूध, शहद, घी और पानी मिलाकर अर्पित करें।
तिल, पुष्प और चंदन से पूजा करें।
विशेष रूप से काले तिल, तंबाकू और शराब का भैरव जी के सामने अर्पण करने की परंपरा है क्योंकि वे इनसे प्रसन्न होते हैं।
सावन कालाष्टमी पर करें इन मंत्रों का जाप
कष्टों के निवारण और बाबा भैरव की कृपा पाने के लिए पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप अवश्य करें:
ॐ शिवगणाय विद्महे गौरीसुताय धीमहि तन्नो भैरव प्रचोदयात।।
ॐ कालभैरवाय नम:
ॐ भ्रां कालभैरवाय फट्
धर्मध्वजं शङ्कररूपमेकं शरण्यमित्थं भुवनेषु सिद्धम्। द्विजेन्द्र पूज्यं विमलं त्रिनेत्रं श्री भैरवं तं शरणं प्रपद्ये।।
