Edited By Tanuja,Updated: 18 Jul, 2026 01:35 PM

पाकिस्तान के कराची में 140 साल पुराने श्री स्वामीनारायण मंदिर से भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकाली गई। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन, नृत्य और जयकारों के साथ रथ खींचा। यह आयोजन पाकिस्तान के हिंदू समुदाय की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत...
Karachi: पाकिस्तान के सिंध प्रांत के कराची शहर में भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक रथ यात्रा पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निकाली गई। कराची के ऐतिहासिक श्री स्वामीनारायण मंदिर से शुरू हुई इस शोभायात्रा में सैकड़ों हिंदू श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के सजे-धजे रथ को भक्तों ने खींचा, जबकि पूरे मार्ग में "हरे कृष्णा" और "जय जगन्नाथ" के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए नाचते-गाते नजर आए। कई श्रद्धालुओं के हाथों में पाकिस्तान का राष्ट्रीय ध्वज भी दिखाई दिया, जो धार्मिक आयोजन के साथ राष्ट्रीय एकता का संदेश देता नजर आया।
पाकिस्तान में भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा ... सभी पाकिस्तान के हिंदूओं पर जगन्नाथ जी का आशीर्वाद सदा बना रहे।
जय जगन्नाथ महाप्रभु! 🚩 ⭕‼️⭕ pic.twitter.com/vOtCt3LdNo
— 💕AरुNA (राजगोर ब्राह्मण) हिन्दू 💕 🇮🇳 (@GorA013) July 16, 2026
कराची की सड़कों पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी इस यात्रा को देखने के लिए जुटे। कराची में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा हर वर्ष आयोजित की जाती है। इसकी शुरुआत श्री स्वामीनारायण मंदिर से होती है और इसमें आसपास के मारी माता मंदिर सहित अन्य हिंदू मंदिरों के श्रद्धालु भी शामिल होते हैं। यह आयोजन पाकिस्तान के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
सीमाएँ देशों को बाँट सकती हैं, लेकिन आस्था की कोई सीमा नहीं होती ..
पाकिस्तान में रहने वाले सनातनी श्रद्धालुओं ने भी पूरे श्रद्धाभाव से भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली!
महाप्रभु सब पर अपनी कृपा बनाए रखें और सभी की रक्षा करें ..
जय जगन्नाथ महाप्रभु!🙏🚩 pic.twitter.com/i3nR7ngBE7
— मासूम बालक 🫂 (@Maasoom_Baalak) July 16, 2026
कराची के मोहम्मद अली जिन्ना रोड स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर लगभग 140 वर्ष पुराना है और पाकिस्तान के सबसे प्रमुख हिंदू धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। वर्ष 1947 के विभाजन के दौरान यह मंदिर भारत जाने वाले शरणार्थियों के लिए राहत शिविर भी बना था। उस समय पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने भी इस परिसर का दौरा किया था। आज भी इस मंदिर में रथ यात्रा के अलावा जन्माष्टमी, दिवाली और अन्य प्रमुख हिंदू त्योहार बड़े पैमाने पर मनाए जाते हैं।