Edited By Tanuja,Updated: 18 Jul, 2026 05:00 PM

फ्रांस ने बजट कटौती और वैश्विक स्तर पर अपने राजनयिक नेटवर्क को छोटा करने की नीति के तहत कराची स्थित अपना कॉन्सुलेट स्थायी रूप से बंद करने का फैसला किया है। हालांकि पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध इस्लामाबाद दूतावास तथा अन्य...
International Desk: फ्रांस ने पाकिस्तान के कराची स्थित अपने महावाणिज्य दूतावास (कॉन्सुलेट जनरल) को स्थायी रूप से बंद करने का फैसला किया है। यह निर्णय फ्रांसीसी सरकार की वैश्विक स्तर पर बजट में कटौती और विदेशों में अपने राजनयिक नेटवर्क को छोटा एवं अधिक प्रभावी बनाने की नीति के तहत लिया गया है। कराची में फ्रांस के महावाणिज्यदूत एलेक्सिस शहताहतिंस्की (Alexis Chahtahtinsky) ने फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस बैस्टिल डे (Bastille Day) के अवसर पर आयोजित समारोह में इस फैसले की घोषणा की।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम केवल वित्तीय कारणों से उठाया गया है और इसका पाकिस्तान के साथ फ्रांस के रिश्तों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।महावाणिज्यदूत ने कहा कि कराची स्थित मिशन बंद होने के बाद भी फ्रांस और पाकिस्तान के बीच राजनयिक, राजनीतिक और आर्थिक संबंध पहले की तरह मजबूत बने रहेंगे। भविष्य में अधिकांश कांसुलर और राजनयिक कार्य इस्लामाबाद स्थित फ्रांसीसी दूतावास के माध्यम से संचालित किए जाएंगे। फ्रांस ने स्पष्ट किया है कि कॉन्सुलेट बंद होने का मतलब यह नहीं है कि वह कराची से पूरी तरह हट रहा है। शहर में फ्रांस की मौजूदगी तीन प्रमुख संस्थाओं के जरिए जारी रहेगी।
- मानद (Honorary) महावाणिज्यदूत, जो कांसुलर सेवाएं और स्थानीय प्रशासन से समन्वय संभालेंगे।
- Pakistan-France Business Alliance (PFBA), जो दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देती रहेगी।
- Alliance Française Karachi, जो फ्रांसीसी भाषा, शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों को पहले की तरह संचालित करती रहेगी।
फ्रांसीसी अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। फ्रांस दुनिया के कई देशों में अपने राजनयिक ढांचे की समीक्षा कर रहा है ताकि सीमित संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सके और विदेशों में अपने मिशनों को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। फ्रांस ने दोहराया कि पाकिस्तान के साथ उसके राजनीतिक, आर्थिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक संबंध सामान्य रूप से जारी रहेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। फ्रांस के अनुसार, कराची उसके लिए अब भी एक महत्वपूर्ण आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र बना रहेगा।