Edited By Ramkesh,Updated: 16 Apr, 2026 12:43 PM

संसद के विशेष सत्र के पहले दिन विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद लोकसभा में महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026' पेश करने के प्रस्ताव के पक्ष में 251 वोट पड़े जबिक विरोध में 185 वोट पड़े। ऐसे में 33 प्रतिशत महिला...
नेशल डेस्क: संसद के विशेष सत्र के पहले दिन विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद लोकसभा में महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026' पेश करने के प्रस्ताव के पक्ष में 251 वोट पड़े जबिक विरोध में 185 वोट पड़े। ऐसे में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण अधिनयम अब पास होने की पूरी संभावना है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून बन जाएगा।

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल आज 'संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026' और 'परिसीमन विधेयक 2026' पेश करेंगे। वहीं, गृह मंत्री अमित शाह केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े संशोधन विधेयक पेश करेंगे। सरकार ने लोकसभा में 'नियम 66' को निलंबित करने का प्रस्ताव रखा है ताकि महिला आरक्षण और परिसीमन बिलों को एक साथ चर्चा कर पारित किया जा सके। विपक्ष ने सरकार की इस जल्दबाजी पर भी सवाल उठाए हैं। प्रस्तावित बिल के तहत लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने की योजना है। विपक्ष का आरोप है कि इससे राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ जाएगा।
विपक्ष की मांग
विपक्ष को डर है कि आबादी के आधार पर सीटों के बंटवारे से दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रभाव कम होगा और उत्तर भारतीय राज्यों (जहां भाजपा मजबूत है) की ताकत बढ़ेगी। INDIA गठबंधन की मांग है कि प्रस्तावित महिला आरक्षण में पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित किया जाए। विपक्ष का कहना है कि विशेष सत्र बुलाकर बिना विस्तृत चर्चा के इन महत्वपूर्ण बदलावों को थोपना "लोकतंत्र के खिलाफ" है।