टीपू सुल्तान चौक’ का नाम बदला! मीरा-भयंदर महापालिका के फैसले से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल

Edited By Updated: 18 Feb, 2026 11:25 PM

tipu sultan controversy

महाराष्ट्र के ठाणे जिले में नामकरण को लेकर बड़ा राजनीतिक फैसला सामने आया है। मीरा-भयंदर महानगरपालिका (MBMC) ने मीरा रोड के नया नगर स्थित ‘हजरत टीपू सुल्तान चौक’ का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित कर दिया है।

नेशनल डेस्क: महाराष्ट्र के ठाणे जिले में नामकरण को लेकर बड़ा राजनीतिक फैसला सामने आया है। मीरा-भयंदर महानगरपालिका (MBMC) ने मीरा रोड के नया नगर स्थित ‘हजरत टीपू सुल्तान चौक’ का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित कर दिया है। अब इस चौराहे का नाम महान क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खान के नाम पर रखा जाएगा।

बुधवार को आयोजित महापालिका की पहली आम सभा में यह प्रस्ताव बहुमत से पारित हुआ। प्रस्ताव सत्तारूढ़ बीजेपी पार्षदों की ओर से लाया गया था, जिसे सदन में संख्या बल के आधार पर मंजूरी मिल गई।

सदन में क्या हुआ?

नवनिर्वाचित बीजेपी पार्षद लंबे समय से इस चौक का नाम बदलने की मांग कर रहे थे। बैठक के दौरान इस पर चर्चा हुई और अंततः प्रस्ताव पास हो गया। विपक्षी दल कांग्रेस ने शुरुआत में इसका विरोध किया और सुझाव दिया कि नाम बदलकर अब्दुल गफ्फार खान के नाम पर रखा जाए। हालांकि, बहुमत बीजेपी के पास होने के कारण उनका संशोधन प्रस्ताव खारिज हो गया। अब आधिकारिक रूप से यह स्थान ‘अशफाक उल्ला खान चौक’ कहलाएगा।

विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?

नामकरण को लेकर चल रही बहस की जड़ें नासिक जिले के मालेगांव में हुई एक घटना से जुड़ी बताई जा रही हैं। वहां समाजवादी पार्टी की डिप्टी मेयर शान-ए-हिंद निहाल अहमद द्वारा अपने कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने के बाद प्रशासन ने उसे हटाने का आदेश दिया था।

इसके बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। महाराष्ट्र कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने एक बयान में टीपू सुल्तान के योगदान का जिक्र किया, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया। बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) ने इसे राज्य की अस्मिता और छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान बताया।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे अनावश्यक प्रचार और महापुरुषों के सम्मान से जुड़ा विषय बताया। कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए और कुछ मामलों में पुलिस ने प्राथमिकी भी दर्ज की।


विवाद बढ़ने पर हर्षवर्धन सपकाल ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था। उन्होंने कहा कि उनका बयान तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और उन्होंने केवल ऐतिहासिक संदर्भ में बात की थी, न कि तुलना के रूप में। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दे को बढ़ाया गया और समाज में अनावश्यक तनाव पैदा किया गया।
 

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!