तालिबान का नया कानून… 'हड्डी न टूटे तो मारपीट जायज' – महिलाओं के अधिकारों पर बड़ा हमला

Edited By Updated: 19 Feb, 2026 02:27 AM

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अफगानिस्तान में तालिबान ने एक नया दंड संहिता (पीनल कोड) लागू किया है, जिसे लेकर मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है। इस नए कानून के तहत पति को अपनी पत्नी और बच्चों को शारीरिक रूप से दंड देने की अनुमति दी गई है, बशर्ते कि “हड्डी न टूटे या खुला...

इंटरनेशनल डेस्कः अफगानिस्तान में तालिबान ने एक नया दंड संहिता (पीनल कोड) लागू किया है, जिसे लेकर मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है। इस नए कानून के तहत पति को अपनी पत्नी और बच्चों को शारीरिक रूप से दंड देने की अनुमति दी गई है, बशर्ते कि “हड्डी न टूटे या खुला घाव न हो।” यह 90 पन्नों का नया कानून तालिबान के सर्वोच्च नेता Hibatullah Akhundzada द्वारा हस्ताक्षरित है।

घरेलू हिंसा पर ढील

नए कानून के अनुसार, अगर पति “अश्लील बल प्रयोग” के दौरान पत्नी को दिखाई देने वाली चोट या फ्रैक्चर पहुंचाता है, तो उसे केवल 15 दिन की जेल हो सकती है। इसके अलावा, आरोपी पति को तभी दोषी ठहराया जाएगा जब महिला अदालत में जाकर अत्याचार साबित कर सके। महिला को अदालत में पूरी तरह ढंके (पर्दे में) रहकर अपने घाव दिखाने होंगे। साथ ही, उसे अपने पति या किसी पुरुष अभिभावक (चैपरन) के साथ अदालत जाना अनिवार्य होगा।

महिलाओं पर सख्त पाबंदियां

इस कानून के तहत अगर कोई विवाहित महिला अपने पति की अनुमति के बिना अपने रिश्तेदारों से मिलने जाती है, तो उसे तीन महीने तक जेल हो सकती है।

समाज को चार वर्गों में बांटा

कानून की धारा 9 के तहत अफगान समाज को चार वर्गों में बांटा गया है:

  1. धार्मिक विद्वान (उलेमा)

  2. अभिजात वर्ग (अशराफ)

  3. मध्यम वर्ग

  4. निम्न वर्ग

इस व्यवस्था में अपराध की सजा अब अपराध की गंभीरता के आधार पर नहीं, बल्कि आरोपी की सामाजिक हैसियत के आधार पर तय होगी। अगर कोई धार्मिक विद्वान अपराध करता है, तो उसे सिर्फ सलाह दी जाएगी। अगर आरोपी अभिजात वर्ग से है, तो उसे अदालत में बुलाकर सलाह दी जाएगी। मध्यम वर्ग के व्यक्ति को उसी अपराध के लिए जेल होगी। जबकि निम्न वर्ग के लोगों को जेल के साथ-साथ शारीरिक दंड (कोड़े आदि) भी दिया जाएगा। इसके साथ ही गंभीर अपराधों में शारीरिक सजा इस्लामी धर्मगुरु देंगे, न कि जेल प्रशासन।

महिलाओं के खिलाफ हिंसा रोकने वाला कानून खत्म

इस नए कोड के साथ 2009 में लागू “महिलाओं के खिलाफ हिंसा उन्मूलन कानून” (EVAW) को खत्म कर दिया गया है। यह कानून पहले अमेरिका समर्थित सरकार के दौरान लागू किया गया था।

डर का माहौल

रिपोर्ट के अनुसार, मानवाधिकार समूहों का कहना है कि लोग इस कानून के खिलाफ बोलने से भी डर रहे हैं। तालिबान ने नया आदेश जारी कर दिया है कि इस दंड संहिता पर चर्चा करना भी अपराध माना जाएगा। अफगान मानवाधिकार संगठन Rawadari, जो निर्वासन में काम कर रहा है, ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अपील की है कि वे इस कानून के क्रियान्वयन को तुरंत रोकें और इसे लागू होने से रोकने के लिए सभी कानूनी उपाय अपनाएं।

संयुक्त राष्ट्र की कड़ी प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत (महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा) Reem Alsalem ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा: “इस नए कानून का महिलाओं और लड़कियों पर असर बेहद भयावह है। तालिबान समझ चुका है कि उन्हें कोई नहीं रोकेगा। क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय उन्हें गलत साबित करेगा? और अगर हां, तो कब?” इस नए कानून ने अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों को लेकर वैश्विक स्तर पर गहरी चिंता पैदा कर दी है।

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