Edited By Parveen Kumar,Updated: 10 Aug, 2026 11:37 PM

भारत ने विदेशी यात्रियों के लिए देश में प्रवेश को और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ई-वीजा पर भारत आने वाले विदेशी नागरिकों के लिए 11 नए एंट्री पॉइंट जोड़ दिए हैं। इसके साथ ही देश में ई-वीजा के जरिए प्रवेश के लिए...
नेशनल डेस्क : भारत ने विदेशी यात्रियों के लिए देश में प्रवेश को और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ई-वीजा पर भारत आने वाले विदेशी नागरिकों के लिए 11 नए एंट्री पॉइंट जोड़ दिए हैं। इसके साथ ही देश में ई-वीजा के जरिए प्रवेश के लिए उपलब्ध कुल रास्तों की संख्या बढ़कर 88 हो गई है।
सरकार के इस फैसले से पर्यटन के साथ-साथ कारोबार, पढ़ाई और इलाज के लिए भारत आने वाले विदेशी नागरिकों को भी सुविधा मिलेगी। नए एंट्री पॉइंट जुड़ने से यात्रियों को अपने गंतव्य के हिसाब से भारत में प्रवेश के लिए ज्यादा विकल्प मिलेंगे।
कौन-कौन से नए रास्ते शामिल हुए?
नई सूची में 9 लैंड पोर्ट और 2 एयरपोर्ट शामिल किए गए हैं। हवाई मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए मध्य प्रदेश का भोपाल एयरपोर्ट और आंध्र प्रदेश का तिरुपति एयरपोर्ट ई-वीजा नेटवर्क में जोड़ा गया है। वहीं, नए लैंड एंट्री पॉइंट में भारत-पाकिस्तान सीमा का अटारी, इसके अलावा दर्रांगा, गेदे, घोजाडंगा, हरिदासपुर, जयगांव, डौकी और मोरेह शामिल हैं।
अब कुल 88 जगहों से ई-वीजा पर एंट्री
11 नए रास्ते जुड़ने के बाद भारत में ई-वीजा यात्रियों के लिए कुल 88 एंट्री पॉइंट हो गए हैं। इनमें 37 एयरपोर्ट, 38 सी-पोर्ट और 13 लैंड चेकपोस्ट शामिल हैं। गृह मंत्रालय के मुताबिक, इस विस्तार का उद्देश्य ई-वीजा व्यवस्था को विदेशी यात्रियों के लिए ज्यादा सुविधाजनक और व्यावहारिक बनाना है। सरकार पिछले कुछ वर्षों से वीजा प्रक्रिया को आसान और डिजिटल बनाने पर जोर दे रही है, ताकि वास्तविक यात्रियों को अनावश्यक कागजी प्रक्रिया का सामना न करना पड़े।
72 घंटे में 95% ई-वीजा आवेदन प्रोसेस
ई-वीजा व्यवस्था के आंकड़े भी इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दिखाते हैं। मंत्रालय के अनुसार, करीब 95 फीसदी ई-वीजा आवेदन 72 घंटे के भीतर प्रोसेस किए जा रहे हैं। भारत की ओर से जारी होने वाले कुल वीजा में अब करीब 78 फीसदी हिस्सा ई-वीजा का है। भारत ने 2014 में केवल 43 देशों के नागरिकों के लिए ई-वीजा सुविधा शुरू की थी। अब इसका दायरा बढ़कर 172 देशों तक पहुंच चुका है।