Edited By Tanuja,Updated: 20 Jun, 2026 12:50 PM

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता की खुलकर प्रशंसा करते हुए उन्हें "बेहद मजबूत" और "कठोर वार्ताकार" बताया। ट्रंप ने कहा कि भारत में लंबे समय तक राजनीतिक स्थिरता लाने में मोदी की भूमिका महत्वपूर्ण रही...
International Desk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की प्रशंसा करते हुए कहा है कि उन्होंने वर्षों से भारत की राजनीति को करीब से देखा है और मोदी का लंबा कार्यकाल उनकी नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है। एक हालिया बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अतीत में भारत में नेतृत्व परिवर्तन अपेक्षाकृत तेजी से होता था, लेकिन मोदी एक दशक से अधिक समय से देश का नेतृत्व कर रहे हैं। ट्रंप के अनुसार, मोदी के व्यक्तित्व में शांति दिखाई देती है, लेकिन वे निर्णय लेने के मामले में बेहद मजबूत और दृढ़ नेता हैं। ट्रंप की मोदी पर की गई खुली प्रशंसा और दूसरी तरफ भारत को प्रभावित करने वाली अमेरिकी नीतियों के बीच का यह विरोधाभास अब चर्चा का विषय बन गया है। सवाल यह है कि क्या यह वास्तविक दोस्ती है, रणनीतिक मजबूरी है या फिर वैश्विक राजनीति का वह पुराना खेल, जिसमें मुस्कान और दबाव दोनों साथ-साथ चलते हैं?
‘मोदी बेहद टफ हैं’
ट्रंप ने हाल के दिनों में कई मौकों पर मोदी की प्रशंसा की है। फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान उन्होंने मोदी को "बहुत कठिन वार्ताकार" और दुनिया के सबसे मजबूत नेताओं में से एक बताया था। उन्होंने कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है और मोदी बातचीत में बेहद सख्त रुख अपनाने वाले नेताओं में से हैं। ट्रंप और मोदी की मुलाकात फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर हुई थी। दोनों नेताओं ने व्यापार, रणनीतिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की। मुलाकात के बाद ट्रंप ने मोदी को अपना पुराना मित्र बताते हुए भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत बताया।
पहले भी कर चुके खुलकर तारीफ
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने मोदी की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की हो। इसी महीने उन्होंने मोदी के लगातार 12 वर्ष पूरे होने पर उन्हें "महान प्रधानमंत्री", "बुद्धिमान", "मजबूत" और "स्वस्थ नेता" बताते हुए बधाई दी थी। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत और अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। हाल के कुछ मतभेदों के बावजूद दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई है।