Edited By Tanuja,Updated: 21 Jul, 2026 07:17 PM

एंडी बर्नहैम ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बन गए हैं। उन्होंने नई कैबिनेट में भारतवंशी कनिष्क नारायण को AI मंत्री और लीजा नंदी को संस्कृति मंत्री बनाया है। सरकार ने डिजिटल आईडी योजना रद्द कर दी है। अर्थव्यवस्था, इमिग्रेशन, रक्षा खर्च और वेलफेयर सुधार...
London: ब्रिटेन में बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ है। एंडी बर्नहैम ने सोमवार को देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेकर आधिकारिक तौर पर कार्यभार संभाल लिया। इसके साथ ही वह पिछले 10 वर्षों में ब्रिटेन के सातवें प्रधानमंत्री बन गए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट से विदाई भाषण देने के बाद किंग चार्ल्स तृतीय को अपना इस्तीफा सौंपा। इसके बाद एंडी बर्नहैम ने बकिंघम पैलेस में किंग चार्ल्स से मुलाकात की और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी की। प्रधानमंत्री बनते ही एंडी बर्नहैम ने अपनी नई कैबिनेट की घोषणा की। उन्होंने कई अनुभवी नेताओं को बरकरार रखा और दो भारतवंशी नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दीं। कनिष्क नारायण को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मंत्री बनाया गया है, जबकि लीजा नंदी को संस्कृति मंत्री के पद पर बरकरार रखा गया है।
कैबिनेट के प्रमुख चेहरे
लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेता जॉन हीली को वित्त मंत्री बनाया गया है। वहीं, पूर्व ऊर्जा मंत्री एड मिलिबैंड को विदेश मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। शबाना महमूद गृह मंत्री के पद पर बनी रहेंगी। वह पहले भी सख्त आव्रजन (इमिग्रेशन) नीतियों के लिए जानी जाती रही हैं। इसके अलावा युवेट कूपर को स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया है, जिन्हें सामाजिक देखभाल व्यवस्था में सुधार की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पहला बड़ा फैसला
सरकार ने अपने पहले महत्वपूर्ण फैसलों में से एक के तहत सभी कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित डिजिटल पहचान पत्र (Digital ID) योजना को रद्द कर दिया है।यह योजना सितंबर 2025 में कीर स्टार्मर सरकार लेकर आई थी। इसका उद्देश्य कर्मचारियों की डिजिटल पहचान और काम करने के कानूनी अधिकार की पुष्टि करना था। हालांकि, विपक्ष और नागरिक अधिकार समूहों ने इसे निजता और डेटा सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए इसका विरोध किया था।
एंडी बर्नहैम के सामने 5 बड़ी चुनौतियां
नई सरकार के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। इनमें धीमी आर्थिक वृद्धि, महंगाई और लोगों के जीवन स्तर में सुधार सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। बर्नहैम ने टैक्स नहीं बढ़ाने और आम लोगों को राहत देने का वादा किया है। इसके अलावा यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और अमेरिका के साथ संबंध भी उनकी विदेश नीति की बड़ी परीक्षा होंगे। रक्षा बजट बढ़ाने, सेना के आधुनिकीकरण और सरकारी खर्च के संतुलन को लेकर भी नई सरकार को कठिन फैसले लेने होंगे।इमिग्रेशन नीति भी बर्नहैम के लिए चुनौती बनी रहेगी। उन्होंने संकेत दिए हैं कि अवैध प्रवासन पर सख्ती जारी रहेगी, हालांकि उनकी पार्टी के कुछ नेता इसका विरोध करते हैं। वेलफेयर (सामाजिक सुरक्षा) पर बढ़ते सरकारी खर्च को नियंत्रित करना भी नई सरकार के लिए सबसे मुश्किल आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों में शामिल होगा।