Edited By Purnima Singh,Updated: 24 Jul, 2026 12:29 PM

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के ऑटोमोबाइल बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक जिले गौतमबुद्ध नगर (नोएडा और ग्रेटर नोएडा) में इस साल वाहनों की बिक्री और पंजीकरण में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है...
इंटरनेशनल डेस्क: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के ऑटोमोबाइल बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक जिले गौतमबुद्ध नगर (नोएडा और ग्रेटर नोएडा) में इस साल वाहनों की बिक्री और पंजीकरण में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। परिवहन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि बढ़ती लागत और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते खरीदार नई गाड़ियां खरीदने से पीछे हट रहे हैं।
वाहन पंजीकरण में आई बड़ी कमी
परिवहन विभाग के अनुसार, वर्ष 2025 में जनवरी से जून के बीच जिले में 75,311 वाहनों का पंजीकरण हुआ था। वहीं, वर्ष 2026 की इसी अवधि में यह संख्या घटकर 64,867 रह गई। यानी छह महीनों में हजारों कम वाहनों का पंजीकरण हुआ, जो ऑटो सेक्टर में सुस्ती का संकेत माना जा रहा है। निजी वाहनों के साथ-साथ व्यावसायिक वाहनों के पंजीकरण में भी करीब 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ा वैश्विक संकट का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, समुद्री परिवहन की बढ़ी लागत और ऑटो पार्ट्स की आपूर्ति में रुकावट के कारण वाहन निर्माण महंगा हो गया है। इसका सीधा असर नई गाड़ियों की कीमतों पर पड़ा है, जिससे उपभोक्ताओं ने फिलहाल खरीदारी टालना शुरू कर दिया है।
हाइटेक शहर में भी मंदी के संकेत
नोएडा और ग्रेटर नोएडा देश के प्रमुख औद्योगिक, आईटी और लॉजिस्टिक्स हब माने जाते हैं। यहां बड़ी संख्या में बहुराष्ट्रीय कंपनियां और औद्योगिक इकाइयां संचालित होती हैं। ऐसे में वाहन पंजीकरण में आई गिरावट को स्थानीय अर्थव्यवस्था और ऑटोमोबाइल बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।