समान नागरिक संहिता को लेकर क्या बोले गोवा के सीएम प्रमोद सावंत?

Edited By Updated: 08 May, 2022 08:02 PM

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गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा है कि गोवा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का पालन किया जा रहा है और किसी तरह का सांप्रदायिक तनाव नहीं हुआ है। सावंत ने सुझाव दिया कि गोवा इस तरह के कानून को लागू करना चाह रहे अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल हो...

नई दिल्लीः गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा है कि गोवा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का पालन किया जा रहा है और किसी तरह का सांप्रदायिक तनाव नहीं हुआ है। सावंत ने सुझाव दिया कि गोवा इस तरह के कानून को लागू करना चाह रहे अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल हो सकता है।

सावंत गोवा नागरिक संहिता का जिक्र कर रहे थे, जिसके तहत राज्य में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई सहित सभी समुदायों को शादी, तलाक, उत्तराधिकार आदि के मामले में एक ही कानून का पालन करना होता है। इसे 1867 की पुर्तगाली नागरिक संहिता से लिया गया है, जो राज्य में पुर्तगाली शासन के दौरान लागू था।भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने समान नागरिक संहिता को लागू करने का प्रस्ताव दिया है क्योंकि यह पार्टी की वैचारिक प्रतिबद्धता है।

सावंत ने कहा, ‘‘गोवा की आजादी के बाद से राज्य में समान नागरिक संहिता का पालन किया जा रहा है...राज्य में यूसीसी के कारण कोई सांप्रदायिक तनाव नहीं हुआ या कोई अन्य मुद्दा नहीं है। गोवा की लगभग एक तिहाई आबादी अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित है जिसमें 27 प्रतिशत ईसाई और पांच से छह प्रतिशत मुसलमान शामिल हैं तथा कोई शिकायत या समस्या नहीं है।''

सावंत ने यूसीसी की विभिन्न सकारात्मक बातों का हवाला देते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों को प्रभावित करने के बजाय यह महिलाओं के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करता है। नागरिक संहिता सभी नागरिकों पर विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत मामलों को नियंत्रित करने वाले कानूनों के एक समान समूह को संदर्भित करती है।

सावंत ने कहा, ‘‘मैं पिछले 10 साल से चुनावी राजनीति में हूं और पिछले तीन साल से गोवा का मुख्यमंत्री हूं। अपने अनुभव से मैं कह सकता हूं कि समान नागरिक संहिता किसी के साथ अन्याय नहीं करती है बल्कि इससे सभी धर्म की महिलाओं के लिए समान अधिकार सुनिश्चित हुए हैं। मुझे लगता है कि यूसीसी को लागू करने में गोवा सभी राज्यों के लिए एक मॉडल होगा।''

पिछले साल मार्च में देश के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे ने गोवा में यूसीसी की सराहना की थी और कहा था, ‘‘गोवा में समान नागरिक संहिता है, जिसकी परिकल्पना भारत के संविधान निर्माताओं ने की थी।'' ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा यूसीसी को लागू करने के प्रयासों को ‘‘असंवैधानिक और अल्पसंख्यक विरोधी कदम'' करार दिया है।

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