Edited By Rohini Oberoi,Updated: 13 Mar, 2026 09:59 AM

आज की युवा पीढ़ी, जिसे हम 'डिजिटल नेटिव्स' कहते हैं बाहर की दुनिया से तो चौबीसों घंटे जुड़ी हुई है लेकिन खुद के साथ उनका कनेक्शन टूटता जा रहा है। हैप्पी एयर के हैप्पीनेस एंबेसडर रवि के अनुसार यह पीढ़ी तकनीक के मामले में जितनी आगे है मानसिक सुकून के...
Gen-Z Anxiety : आज की युवा पीढ़ी, जिसे हम 'डिजिटल नेटिव्स' कहते हैं बाहर की दुनिया से तो चौबीसों घंटे जुड़ी हुई है लेकिन खुद के साथ उनका कनेक्शन टूटता जा रहा है। हैप्पी एयर के हैप्पीनेस एंबेसडर रवि के अनुसार यह पीढ़ी तकनीक के मामले में जितनी आगे है मानसिक सुकून के मामले में उतनी ही पीछे।
क्यों बढ़ रही है युवाओं में मानसिक उलझन?
1. दिमाग का ओवरटाइम करना: एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज के युवाओं का दिमाग कभी शांत नहीं रहता। सूचनाओं के लगातार ओवरलोड के कारण मन में हमेशा स्ट्रेस, पुराने पछतावे और भविष्य की चिंता चलती रहती है। यही 'ओवरथिंकिंग' आगे चलकर एंग्जायटी और अचानक आने वाले पैनिक अटैक की वजह बनती है।
2. सोशल मीडिया और परफेक्शन का जाल: इंस्टाग्राम और फेसबुक की परफेक्ट दुनिया ने तुलना के जहर को बढ़ा दिया है। दूसरे की शानदार लाइफ देखकर अपनी जिंदगी से तुलना करना Gen-Z की सबसे बड़ी कमजोरी बन गई है। इससे उनमें आत्मसम्मान की कमी (Low Self-Esteem) होने लगती है और वे खुद को दूसरों से कमतर आंकने लगते हैं।

3. लक्ष्य की कमी और खालीपन: आजकल की दौड़ में हर कोई भाग तो रहा है लेकिन मंज़िल का पता नहीं। बिना किसी ठोस लाइफ-गोल के सिर्फ बेहतर करने की धुन ने युवाओं के भीतर एक अजीब सा खालीपन भर दिया है। सफलता को केवल पैसा और प्रसिद्धि से मापने की वजह से मानसिक शांति कहीं पीछे छूट गई है।
4. डिजिटल लत और एकांत का अभाव: आज का युवा खुद के साथ वक्त बिताना भूल गया है। मोबाइल की लत ने उनसे उनका 'मी-टाइम' (Me-Time) छीन लिया है। भावनाओं को भीतर दबाने और स्क्रीन से चिपके रहने की आदत अब गंभीर मानसिक बीमारियों का रूप ले रही है।

एक्सपर्ट की सलाह: कैसे पाएं इससे छुटकारा?
अगर आप या आपके आसपास कोई इस स्थिति से गुजर रहा है तो ये तरीके कारगर हो सकते हैं:
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डिजिटल डिटॉक्स: दिन भर में कुछ घंटे मोबाइल और इंटरनेट से पूरी तरह दूरी बनाएं।
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मैडिटेशन: मन को शांत रखने के लिए रोजाना कम से कम 15-20 मिनट ध्यान (Meditation) का अभ्यास करें।
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तुलना बंद करें: यह समझें कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर चीज सच नहीं होती। अपनी तुलना दूसरों से करना बंद करें।
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सेल्फ-कनेक्ट: गैजेट्स के बजाय असली लोगों से मिलें और प्रकृति के साथ वक्त बिताएं।