जो लोग श्राद्ध करने में यकीन नहीं करते वे अवश्य पढ़ें...

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Friday, September 16, 2016-10:25 AM
इस वर्ष पितृ पक्ष 16 सितम्बर से 30 सितम्बर, अमावस तक होगा । इस साल श्राद्ध का पहला दिन ही चंद्र ग्रहण से आरंभ हो रहा है जो 16 सितम्बर की रात्रि 10 बजकर 24 मिनट पर कुंभ राशि में लगेगा और 17 तारीख की प्रात: 2 बजकर 23 मिनट पर समाप्त होगा। वैसे तो संपूर्ण वर्ष में 96 श्राद्ध के अवसर आते हैं परंतु आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से अमावस तक का समय श्राद्ध या महालय पक्ष कहलाता है। आश्विन मास का कृष्ण पक्ष श्राद्ध के लिए तय है। 
 
 
सदियों से चली आ रही भारत की इस व्यावहारिक एवं सुंदर परम्परा का निर्वाह अवश्य करें। हम पश्चिमी सभ्यता की नकल करके मदर्स डे, फादर्स डे, सिस्टर डे, वूमन डे, वैलेेंटाइन डे आदि पर ग्रीटिंग कार्ड या गिफ्ट देकर ‘डे’ मना लेते हैं पर उसके पीछे निहित भावना या उद्देश्य को अनदेखा कर देते हैं परंतु श्राद्धकर्म का एक समुचित उद्देश्य हैै।
 
ऐसा नहीं है कि केवल हिन्दुओं में ही मृतकों को याद करने की प्रथा है। ईसाई समाज में निधन के 40 दिनों बाद एक रस्म की जाती है जिसमें सामूहिक भोज का आयोजन होता है। इस्लाम में भी 40 दिनों बाद कब्र पर जाकर फातिहा पढऩे का रिवाज है। बौद्ध धर्म में भी ऐसे कई प्रावधान हैं।  
 
  
वैज्ञानिक दृष्टिकोण 
हमारे समाज में हर सामाजिक एवं वैज्ञानिक अनुष्ठान को धर्म से जोड़ दिया गया था ताकि परम्पराएं चलती रहें। श्राद्धकर्म इसी शृंखला का एक भाग है जिसके सामाजिक या पारिवारिक औचित्य को अनदेखा नहीं किया जा सकता। 
 
 

विवाह समारोहों से पूर्व दिवंगत आत्माएं अपना आशीर्वाद देने सपने या साक्षात रूप में चली आती हैं। इसीलिए भारतीय संस्कृति में किसी भी मंगल कार्य के समय एक थाली पितरों के लिए, एक गाय, एक कौवे  और एक कुत्ते के लिए निकाली जाती है ताकि हमारे पूर्वज किसी रूप में भी हों, वे प्रसन्न होकर आशीष दें और कार्य सफल हो। यह श्राद्ध का ही एक अंग है जिसका उद्देश्य है अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करना। 


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