तीर्थ जीवन रूपी गाड़ी के सर्विस स्टेशन हैं: स्वामी ज्ञानानंद

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Thursday, January 11, 2018-4:52 AM

भगवान पद्मनाभ के दर्शनों के साथ सम्पन्न हुई सत्संग सद्भाव यात्रा

तिरुवनंतपुरम/पठानकोट, (तिलक, आदित्य): गीता सत्संग सद्भावना यात्रा के समापन दिवस पर यात्रा प्रात: काल कन्याकुमारी से तिरुवनंतपुरम पहुंची। तीर्थ यात्रा के महत्व को बताते हुए गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि तीर्थ जीवन रूपी गाड़ी के सर्विस स्टेशन हैं। आज भगवान पद्मनाभ के दर्शनों के साथ सत्संग सद्भाव यात्रा सम्पन्न हुई। उन्होंने कहा कि तीर्थों में आ करके जहां हमें संसार के तनाव से अलग होकर कुछ दिन बिताने का अवसर मिलता है, वहीं तीर्थों का सात्विक, आध्यात्मिक वातावरण हमारे अंदर के कल्मष को दूर करने में सहयोगी होता है। सच तो यह है कि जैसे सड़क पर चलने वाले वाहनों के लिए सर्विस स्टेशन की आवश्यकता होती है, ऐसे ही जीवन रूपी गाड़ी के लिए तीर्थ सर्विस स्टेशन की भूमिका निभाते हैं। स्वामी ज्ञानानंद जी ने कहा कि संपूर्ण सत्संग सद्भाव तीर्थ यात्रा में ऐसा लगभग सभी भक्तों ने अनुभव भी किया है। भगवान नारायण का 18 फीट का विश्राम मुद्रा में श्री विग्रह आज भी लाखों-लाखों भक्तजनों की श्रद्घा का केन्द्र बना हुआ है।यात्रा के समापन पर सब भक्तों ने स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के संग यह संकल्प भी लिया कि गीता पढ़ेंगे और पढ़ाएंगे। गीता को जीवन का गीत बनाएंगे। महाराज श्री के साथ आए ब्रह्मचारी शक्ति, ब्रह्मचारी रमेश, ब्रह्मचारी केशव, ब्रह्मचारी मनमोहन वासुदेव, पंजाब से सुदर्शन अग्रवाल, सतीश महेन्द्रू, अंबाला से अशोक चावला, पं.तिलक राज शर्मा, हैप्पी चावला, रमेश सचदेवा, करनाल से रेणु बाला गुप्ता (मेयर करनाल), पवन गुम्बर, कुरुक्षेत्र से हंसराज सिंगला, हिसार से दयानंद बैनीवाल, पेहवा से राजेन्द्र चोपड़ा, पठानकोट से मानव ने सत्संग सद्भावना यात्रा का नेतृत्व किया।

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