वास्तुदोष का करें अंत सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य का होगा आरंभ

Edited By ,Updated: 27 Jan, 2015 08:08 AM

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गणेश पुराण के अनुसार ‘प्राच्यां रक्षतु बुद्धिशा, अग्नेयां सिद्धिदायक: दक्षिणस्याम उमापुत्रो, नैऋत्यं तु गणेश्वर, प्रतिच्यां विघ्नहर्ताव्यां वायव्याम गजकर्णक:।’

गणेश पुराण के अनुसार ‘प्राच्यां रक्षतु बुद्धिशा, अग्नेयां सिद्धिदायक: दक्षिणस्याम उमापुत्रो, नैऋत्यं तु गणेश्वर, प्रतिच्यां विघ्नहर्ताव्यां वायव्याम गजकर्णक:।’ 

अर्थात गणेश जी के विविध सत्व सभी दिशाओं से मनुष्य की रक्षा करते हैं। वास्तु देव को प्रसन्न करने के लिए नित्य गणेश जी का पूजन करें। ऐसा करने से घर का वास्तु दोष तो समाप्त होगा ही दोनों देवों की कृपा से सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य व शांति बनी रहेगी।
 
1 भवन के ब्रह्म स्थान अर्थात केंद्र में, ईशान कोण एवं पूर्व दिशा में गणेश जी का स्वरूप स्थापित करना शुभ होता है।
 
2 टॉयलेट अथवा ऐसे स्थान पर गणेश जी का स्वरूप नहीं लगाना चाहिए जहां लोगों को थूकने आदि से रोकना हो। ऐसा करने से गणेश जी का अपमान होता है और आप पापों के भागी बनते हैं।
 
3 स्वेत आर्क का वास्तु गणेश सभी प्रकार के दोषों को मुक्ति हेतु सबसे सरल साधन तथा मनोकामना सिद्ध करनेवाला कहा जाता है।
 
4 स्वेत आर्क एक ऐसा पौधा होता है जिसको हिंदू दर्शन के अनुसार साक्षात् ही गणेश का रूप कहा जाता है। प्रतिमा के आभाव में इसकी लकड़ी एवं पुष्प पत्ते सभी भवन को वास्तु दोषों से मुक्त बनते हैं ।
 
5 गणेश जी की प्रतिमा पर कभी तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए बल्कि गणेश जी पर दूर्वा चढ़ाई जाती है। दूर्वा से गणेश जी प्रसन्न होकर कृपा करते हैं। 

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