Edited By ,Updated: 20 Jun, 2026 03:12 AM

‘राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो’ (एन.सी.आर.बी.) की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में देश भर में 91,296 बच्चे लापता होने की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करवाई गई। लापता बच्चों में 68,835 लड़कियां और 22,461 लड़के शामिल हैं। यह संख्या 2022 में लापता...
‘राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो’ (एन.सी.आर.बी.) की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में देश भर में 91,296 बच्चे लापता होने की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करवाई गई। लापता बच्चों में 68,835 लड़कियां और 22,461 लड़के शामिल हैं। यह संख्या 2022 में लापता हुए बच्चों की तुलना में 9.5 प्रतिशत अधिïक है और बच्चों के लापता होने का यह सिलसिला अब भी जारी है।
नवजात बच्चों का अपहरण करके उन्हें नि:संतान दम्पतियों को बेचना, बड़ी आयु के बच्चों को भिक्षावृत्ति, चोरी-चकारी जैसे अपराधों में धकेला जा रहा है। बाल तस्करी की ऐसी ही पिछले 3 महीनों की चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :
* 21 अप्रैल को ‘बनासकांठा’ (गुजरात) पुलिस ने एक अंतर्राज्यीय बच्चा चोर गिरोह के सरगना ‘मुरुगन’ को गिरफ्तार करके उसके द्वारा अपहरण किए गए एक चार वर्षीय बच्चे को बरामद किया। यह गिरोह गुजरात, दिल्ली, तेलंगाना और महाराष्टï्र से नवजात बच्चों को चुरा कर 4 से 5 लाख रुपयों में बेचता था।
* 28 मई को ‘बरेली’ (उत्तर प्रदेश) में पुलिस ने बच्चा चोर गिरोह के 2 सदस्यों ‘योगेश कनौजिया’ तथा ‘पवन चंदेल’ को एनकाऊंटर में घायल करके उनके पास से एक मंदिर से चुराए गए डेढ़ वर्ष के एक बच्चे को बरामद किया।
‘योगेश’ तथा ‘पवन’ बच्चे को दिल्ली में बेचने के इरादे से मोटरसाइकिल पर जा रहे थे। तभी सूचना मिलने पर पुलिस ने ‘फुलासी तिराहे’ पर उन्हें रोकना चाहा तो उन्होंने बच निकलने की कोशिश की लेकिन इसी बीच बच्चा उनके हाथों से छूट कर सड़क के निकट झाडिय़ों में जा गिरा जिसे पुलिस ने उठा कर इलाज के लिए भेज दिया और दोनों बच्चा चोरों को गिरफ्तार कर लिया।
* 2 जून को ‘हापुड़’ पुलिस ने बच्चों का अपहरण करने वाले गिरोह के 4 सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से एक बच्चे को मुक्त करवाया। यह गिरोह अलग-अलग उम्र के बच्चों को चुराकर उन्हें जरूरतमंदों को बेचता था।
* 10 जून को ‘आंध्र प्रदेश’ में ‘ओंगोल’ रेलवे स्टेशन पर ‘प्रकाशम जिला बाल कल्याण समिति’ और पुलिस ने बच्चे चुराने वाले एक गिरोह के 12 सदस्यों को गिरफ्तार करके बिहार से तमिलनाडु में मजदूरी करने के लिए ले जाए जा रहे 15 बच्चों को मुक्त करवाया।
* 12 जून को ‘इटावा’ (उत्तर प्रदेश) में 5 माह की बच्ची को बरामद किया गया। इस का 27 मई को ‘हरिद्वार’ (उत्तराखंड) में ‘हर की पौड़ी’ से अपहरण कर लिया गया था। उक्त बच्ची के माता-पिता ‘संभल’ (उत्तर प्रदेश) से गंगा में स्नान करने हरिद्वार आए थे।
* और अब 18 जून को दिल्ली पुलिस ने बच्चा चोर गिरोह की सरगना सहित 13 आरोपियों को गिरफ्तार करके उनसे मुक्त करवाए गए 5 नवजात बच्चों को ‘बाल कल्याण समिति’ की देखरेख में भेज दिया। इनमें एक बच्चे की आयु 4 माह, 2 बच्चों की आयु 27 दिन, एक बच्चे की आयु 20 दिन तथा एक अन्य बच्चे की आयु मात्र 5 दिन थी।
इस गिरोह के तार दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात से जुड़े बताए जाते हैं। यह गिरोह आॢथक रूप से कमजोर परिवारों को अच्छी-खासी रकम का लालच देकर उनके नवजात बच्चे ले लेता था। इसके बाद दिल्ली के एक अस्पताल के जरिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर नि:संतान दम्पतियों को लाखों रुपयों (लड़कियों को 1 लाख और लड़कों को 2 लाख तक) में बेच दिया जाता था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस मामले की जांच एक महिला के बारे में पुख्ता जानकारी मिलने बाद शुरू हुई जिसे 20 दिन पहले भी एक नवजात बच्चे के साथ देखा गया था जो बाद में गायब हो गया।
राजधानी दिल्ली तथा देश के अन्य भागों में सुनियोजित ढंग से बच्चा चुरा कर बेचने वाले गिरोहों की सक्रियता गंभीर प्रश्न खड़े करती है। अत: माता-पिता को अपने बच्चों की सुरक्षा पर अधिक ध्यान देने, विशेषकर रेलवे स्टेशनों तथा अन्य भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है क्योंकि जरा-सी लापरवाही की बड़ी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। इस बुराई पर रोक लगाने के लिए ऐसे अपराधों में संलिप्त होने वालों को कठोरतम दंड दिए जाने की भी जरूरत है।—विजय कुमार