जम्मू-कश्मीर में फिर आतंकवादियों द्वारा खून-खराबा और उत्पात

Edited By Updated: 23 Dec, 2023 05:41 AM

bloodshed and violence again by terrorists in jammu and kashmir

1947 में अपनी स्थापना के समय से ही पाकिस्तानी शासकों ने भारत के विरुद्ध छेड़े छद्म युद्ध में अपने पाले हुए आतंकवादियों और अलगाववादियों के जरिए कश्मीर में अशांति फैलाने, दंगे करवाने, हथियार और गोला-बारूद भेजने, आतंकवाद भड़काने, नकली करंसी और नशा...

1947 में अपनी स्थापना के समय से ही पाकिस्तानी शासकों ने भारत के विरुद्ध छेड़े छद्म युद्ध में अपने पाले हुए आतंकवादियों और अलगाववादियों के जरिए कश्मीर में अशांति फैलाने, दंगे करवाने, हथियार और गोला-बारूद भेजने, आतंकवाद भड़काने, नकली करंसी और नशा भेजने, बगावत के लिए लोगों को उकसाने और आजादी की दुहाई देने का सिलसिला जारी रखा हुआ है। परिणाम यह है कि भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे ‘आप्रेशन आलआऊट’ के अंतर्गत आतंकवादियों के सफाए तथा समय-समय पर आतंकवादी घटनाओं की पूर्व सूचना के इनपुट के बावजूद ऐसी घटनाएं रह-रह कर हो रही  हैं। 

कश्मीर में आतंकियों पर नकेल कसने के बाद पाकिस्तान और उसके पाले हुए आतंकवादी गत 2-3 वर्षों से जम्मू के सीमावर्ती जिलों राजौरी और पुंछ में अपनी नापाक हरकतें बढ़ाने के षड्यंत्र रचने लगे हैं। आतंकवादी इन दोनों जिलों के गांवों में घुस कर आम लोगों पर भी कई हमले कर चुके हैं। इसी वर्ष के दौरान इस क्षेत्र में आतंकी घटनाओं में : 

  • 1 तथा 2 जनवरी को राजौरी जिले के ढांगरी गांव में आतंकवादियों ने 7 ग्रामीणों को मार डाला। 
  • 20 अप्रैल को राजौरी और पुंछ जिलों की सीमा पर स्थित घने जंगलों वाले इलाके ‘ढेरा की गली’ तथा ‘बुफलियाज’ के बीच सेना के एक वाहन पर घात लगाकर किए गए हमले में आतंकवादियों ने 5 सैनिकों को शहीद कर दिया।
  • 22-23 नवम्बर को राजौरी के बाजीमाल इलाके में मुठभेड़ के दौरान सेना के 2 कैप्टन और 3 जवान शहीद हुए। 
  • 20 दिसम्बर को पुंछ जिले की सूरनकोट तहसील में स्थित सशस्त्र पुलिस की छठी वाहिनी के मुख्यालय परिसर में हुए रहस्यमय विस्फोट से वहां खड़े वाहनों को क्षति पहुंची तथा उनके शीशे टूट गए। धमाका इतना जोरदार था कि दूर तक इसकी आवाज सुनाई दी।
    इससे पहले नवम्बर महीने के मध्य में भी यहां स्थित एक मंदिर में रहस्यमय  धमाका हुआ था, जिसकी जांच अभी तक सिरे नहीं चढ़ पाई है।
  • और अब 21 दिसम्बर को पुंछ जिले में ही पाकिस्तान स्थित आतंकी गिरोह ‘लश्कर-ए-तैयबा’ की शाखा ‘पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट’ (पी.ए.एफ.एफ.) के हथियारों से लैस आतंकवादियों ने ‘ढेरा की गली’ तथा ‘बुफलियाज’ के बीच ‘धत्यार’ मोड़ पर घात लगाकर सेना के 2 वाहनों पर हमला करके 5 सैनिकों को शहीद व 2 अन्यों को घायल कर दिया। 

बताया जाता है कि हमलावरों ने कुछ शहीद जवानों के शवों के साथ बर्बरता भी की और उनके शरीर के कुछ अंग काट कर अपने साथ ले गए। सूत्रों के अनुसार आतंकियों ने इस हमले के लिए ग्रेनेडों के साथ-साथ गोलियों की बौछार के लिए अमरीकन असाल्ट राइफलों का प्रयोग किया ताकि जवानों को संभलने का मौका ही न मिल पाए। सेना के 2 वाहनों में 8 जवान सवार थे और सूत्रों का कहना है कि यदि वाहनों में अधिक जवान होते तो अधिक नुकसान हो सकता था।

जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा है कि अभी तक हम शांत थे परंतु पाकिस्तान शांत होने का नाम नहीं ले रहा है, हम इसका बदला लेंगे। उल्लेखनीय है कि सीमा पार से सक्रिय लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद तथा हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे आतंकवादी गिरोहों को पाकिस्तान की गुप्तचर एजैंसी आई.एस.आई. अपना समर्थन और सहायता प्रदान कर रही है।

बी.एस.एफ. के महानिदेशक अशोक यादव के अनुसार लगभग 250 से 300 आतंकवादी जम्मूृ-कश्मीर में घुसपैठ की फिराक में सीमा पार लांचपैड पर मौजूद हैं। इस पृष्ठïभूमि में सुरक्षा प्रबंध और मजबूत करने तथा चौकसी बढ़ाने की आवश्यकता बढ़ गई है क्योंकि अब पाकिस्तान ने सीमा पार से ड्रोनों द्वारा भारतीय क्षेत्र में नशों के साथ-साथ हथियार फैंकना भी शुरू कर दिया है। राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि जब तक पाकिस्तान अपने पाले हुए आतंकवादियों को भारत विरोधी गतिविधियों के लिए शरण और सहायता देना बंद नहीं करेगा, तब तक दोनों देशों के रिश्ते सामान्य होने की आशा करना व्यर्थ ही होगा। -विजय कुमार 

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